बंदरों के आतंक से चंबा के कई इलाकों में घटा गेहूं का उत्पादन
जिला मुख्यालय के साथ लगते क्षेत्रों में आई उत्पादन में गिरावट
संवाद न्यूज एजेंसी
चंबा। जिला मुख्यालय के साथ लगते क्षेत्रों में गेहूं के उत्पादन में गिरावट नजर आ रही है। दस साल पहले इन क्षेत्रों से टनों के हिसाब से गेहूं का उत्पादन रहता था। अब यह उत्पादन काफी कम हो गया है। प्रत्येक किसान करीब आठ से 15 क्विंटल तक गेहूं की पैदावार करता था। यह उत्पादन अब दो से तीन क्विंटल में ही सिमट गया है। किसानों ने इसकी वजह बंदरों और लावारिस पशुओं के आतंक को बताया है। किसानों का कहना है कि करीब एक दशक पहले क्षेत्र में बंदरों की संख्या नाममात्र थी, मगर अब यह संख्या बढ़कर हजारों में हो गई है। ऐसे में इन क्षेत्रों के किसानों का अब गेहूं की बिजाई करने से से मोहभंग हो रहा है। जानकारी के अनुसार शहर के साथ लगते करियां, मुगला और भड़ियांकोठी के किसान टनाें के हिसाब से गेहूं का उत्पादन करते थे। अब उत्पादन का यह ग्राफ बेहद कम हो गया है। किसानों में जीवन सिंह, रमन कुमार, अमित कुमार, चैन लाल, सुरेंद्र सिंह, राजन सिंह और रोहित कुमार का कहना है कि फसलों को बंदर काफी नुकसान पहुंचा रहे हैं। ऐसे में गेहूं की पैदावार पिछले दस सालों से प्रभावित हो रही है। हालांकि, सरकार की ओर से बंदराें को पकड़ने की योजना चलाई थी, मगर यह योजना कामयाब नहीं हो पाई है। बहरहाल, अब हजारों की संख्या में बंदर हैं, जो फसलों को नष्ट कर रहे हैं।
उधर, कृषि उपनिदेशक चंबा डॉ कुलदीप धीमान ने माना कि कुछ क्षेत्रों में बंदर फसलों को नुकसान पहुंचा रहे है। बताया कि सरकार की योजनाओं का लाभ लेकर लोग नुकसान को कम कर सकते हैं।