संवाद न्यूज एजेंसी
नकरोड़ (चंबा)। यूं तो विकास के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन जिला चंबा के कई गांव ऐसे हैं, जहां सड़क के अभाव में लोगों की जिंदगी दांव पर लग रही है।
जम्मू-कश्मीर से सटी जिले की आयल पंचायत के एक दर्जन गांव आजादी के सात दशक बाद भी सड़क से महरूम हैं। सड़क के अभाव ने इस पंचायत की महिला की जान ले ली। जम्मू-कश्मीर सीमा से सटी आयल पंचायत की 35 वर्षीय गुड्डो देवी पत्नी मेला राम बीते बुधवार को घर की सीढि़यों से गिरकर चोटिल हो गई थीं। परिजन महिला को चारपाई में उठाकर दो घंटे के ऊबड़-खाबड़ रास्ते से ले तो गए, लेकिन गुड्डी देवी जिंदगी की जंग हार गईं। महिला की गिरने की आवाज सुनकर परिजन मौके पर पहुंचे और बुरी तरह से घायल महिला को चारपाई पर उठाकर तीसा अस्पताल के लिए चल पड़े, लेकिन महिला ने बीच रास्ते में दम तोड़ दिया। मृतका के 18 वर्षीय और 13 वर्षीय दो बेटे हैं। महिला का शव उसी चारपाई पर वापस घर लाना पड़ा।
वहीं, एक अन्य मामले में बीते सप्ताह अपेंडिक्स का दर्द शुरू होने पर ध्यान सिंह को भी चारपाई पर पांच किलोमीटर दूर सड़क तक पहुंचाना पड़ा। यहां से तीसा अस्पताल और फिर टांडा मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया। ऑपरेशन के बाद शुक्रवार को वापस व्यक्ति को चारपाई से ही घर पहुंचाना पड़ा।
उधर, ग्रामीणों को मलाल है कि उनकी पंचायत के एक दर्जन गांव सड़क से जुड़े होते तो गुड्डो देवी को जाड्न गंवानी पड़ती। आयल पंचायत के लोगों ने कहा कि वे नेताओं के झूठे वादों से तंग आ चुके हैं। उन्होंने पंचायत को सड़क से जोड़ने के लिए लिखित आश्वासन न मिलने पर लोकसभा चुनाव का बहिष्कार करने की घोषणा कर दी है। कहा कि आयल पंचायत के खैरना, भलोड़ी, चंतरोल, साहू, सलेन, गुआड़ी, चुहाली, सरोग, संगवाड़ी, कलयाहण और खानगू गांवों में बीमार होने पर लोगों को चारपाई या पीठ पर सड़क तक पहुंचाना पड़ता है।
आयल पंचायत की 2800 की आबादी के लिए सड़क महज सपना ही है। समय पर स्वास्थ्य केंद्र में न पहुंचने से अब तक एक दर्जन से अधिक लोग जान गंवा चुके हैं। सड़क बनाने का लिखित आश्वासन देने वाले राजनीतिक दल को ही वोट देंगे। - राजेंद्र कुमार
पंचायत में डाकघर, पुलिस बटालियन की टुकड़ी और वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला आयल है। यहां पहुंचने के लिए गांवों के विद्यार्थियों और ग्रामीणों को दो से पांच किमी पैदल सफर करना पड़ता है। शिक्षा अर्जित करना भी पंचायत के बच्चों के लिए काफी जटिल ही बना हुआ है। - गणेश
सड़क के अभाव में पंचायत में विकास की धारा नहीं बह पाई है। ग्रामीणों को गृह निर्माण और खाद्य सामग्री पीठ पर या खच्चर मालिकों को 500 से एक हजार रुपये देकर घर तक पहुंचानी पड़ती है। सरकार, प्रशासन और विभाग से कई बार मांग उठाई गई। लेकिन कुछ नहीं हुआ। - प्रेम सिंह
आयल पंचायत अति संवेदनशील है। पंचायत की सीमा पड़ोसी राज्य जम्मू-कश्मीर से सटी है। सुरक्षा की दृष्टि से यहां तैनात प्रदेश पुलिस बटालियन के जवानों को भी पैदल ही राशन और जरूरी सामान लाना पड़ता है। - बलदेव
पंचायत प्रधान शुक्रदीन ने कहा कि कई बार सरकार, प्रशासन और विभाग सड़क के अभाव में पंचायत में विकास की धारा नहीं बह पाई है। ग्रामीणों को गृह निर्माण और खाद्य सामग्री पीठ पर या खच्चर मालिकों को 500 से एक हजार रुपये देकर ही घर तक पहुंचानी पड़ती है। उन्होंने सरकार, प्रशासन और विभाग से मांग से पंचायत को सड़क सुविधा से जोड़ने की मांग उठाई है।
उधर, लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता जोगिंद्र सिंह ने बताया कि यदि लोग सड़क बनाने के लिए अपनी जमीनें विभाग के नाम करते हैं तो सर्वे करवा कर सड़क बनाने के लिए प्रयास किए जा सकते हैं।
आयल पंचायत में बीमार व्यक्ति को चारपाई पर लेकर जाते परिजन। संवाद