कम उत्पादन से छोटे बागवानों और स्थानीय रोजगार पर भी पड़ेगा असर, खर्च निकालना हुआ मुश्किल
पहले सात हजार मीट्रिक सेब होने था अनुमान, अब ढ़ाई हजार पर अटकी सूई
संवाद न्यूज एजेंसी
भरमौर (चंबा)। उपमंडल भरमौर की अर्थव्यवस्था में अहम भूमिका निभाने वाली सेब की फसल इस बार भी बागवानों की उम्मीदों पर खरी नहीं उतर पाई है। फूल आने के दौरान मौसम में अचानक आई ठंडक और प्रतिकूल परिस्थितियों के कारण फल की सेटिंग प्रभावित हुई, जिससे उत्पादन में भारी गिरावट दर्ज की जा रही है।
उद्यान विभाग ने इस वर्ष करीब सात हजार मीट्रिक टन सेब उत्पादन का अनुमान लगाया था, लेकिन अब फील्ड से मिले आंकड़ों के अनुसार उत्पादन घटकर करीब ढाई हजार मीट्रिक टन तक सीमित रहने की संभावना है। बागवानों का कहना है कि यदि मौसम आगे भी प्रतिकूल रहा तो उत्पादन और कम हो सकता है।
भरमौर क्षेत्र की उलांसा, संचूई, खणी, गरीमा, गरोला, बंडग्राम, पूलन, चौविया, दियोल, कुगति, चन्हौता और लांबू पंचायतों में बड़े स्तर पर सेब की खेती की जाती है। यहां कई परिवारों की आजीविका सेब उत्पादन पर निर्भर करती है। खासकर छोटे बागवान मणिमहेश यात्रा के दौरान सड़क किनारे सेब बेचकर अच्छी आमदनी अर्जित करते थे।
बागवानों का कहना है कि इस बार फसल कम होने से खाद, दवाइयों और पौधों की देखभाल पर किया गया खर्च निकालना भी मुश्किल हो जाएगा। पिछले वर्ष भी बेहतर उत्पादन के बावजूद मंडियों में उचित दाम नहीं मिलने से किसानों को नुकसान उठाना पड़ा था।
इनसेट
इस बार सात हजार मीट्रिक टन का अनुमान था, लेकिन अब दो से ढाई हजार मिट्रिक सेब दिख रहा है। -डाॅ. मनोहर लाल,द्यान एवं बागवानी विभाग के कार्यवाहक विषय वस्तु विशेषज्ञ