चंबा। जिला मुख्यालय में अखरोट का कारोबार इस बार रफ्तार नहीं पकड़ पाया है। हालांकि कई क्षेत्रों में उत्पादन सही रहा, लेकिन गुणवत्ता प्रभावित हो गई है और आकार छोटा रह गया। वहीं, कुछ इलाकों में उत्पादन 40 प्रतिशत तक गिरा है। ऐसे में बाजार में मांग पूरी नहीं हो पा रही है।
विक्रेता और किसान इस बार बरसात के मौसम में आई आपदा को इसका कारण बता रहे हैं। बरसात के दौरान खेतों के किसान तक बगीचे और खेत गए और फसल भी बर्बाद हो गई।
जानकारी के अनुसार जिला चंबा में अखरो का उत्पादन जनजातीय क्षेत्र होली, भरमौर सहित होली, तीसा और लिल्ह क्षेत्र में अधिक रहता है। मगर इस बार क्वालिटी नहीं मिल पा रही है। अखरोट का साइज भी काफी छोटा है।
इस बार अखरोट की आपूर्ति काफी कम हो रही है। इससे ग्राहकों को डिमांड के तहत आपूर्ति नहीं हो पा रही है। आपदा के चलते इस बार अखरोट की पैदावार में गिरावट आई है। लक्ष्य चौपड़ा, अखरोट विक्रेता
उत्पादन वाले क्षेत्रों से आपूर्ति तो सही हो रही है, मगर क्वालिटी इस बार काफी निम्न स्तर की है, जो ग्राहकों को नहीं भा रही है। बरसात में हुआ नुकसान इसका वजह माना जा सकता है। नवीन कुमार, अखरोट विक्रेता
आपदा के चलते इस बार अखरोट की पैदावार प्रभावित हुई है। खेतों में हुए नुकसान के चलते ऐसी समस्याएं पेश आई है। पिछले साल की अपेक्षा करीब चालीस प्रतिशत कम उत्पादन हुआ है। महात्मो राम, किसान
जिला के जनजातीय और गैर जनजातीय इलाकों में ज्यादा अखरोट का उत्पादन होता है। मगर इस बार आपदा के चलते उत्पादन में कमी आई है। लिहाजा, बाजार में डिमांड पूरी न होना भी इसकी वजह है। लवली राम, किसान