वर्ष 1972 में बनी भरमौर-ग्रीमा-सिंयूर जीप योग्य सड़क पर बस चलने का सपना साकार नहीं हो पाया है। करीब 42 वर्ष पहले बनी सड़क को लोक निर्माण विभाग बस चलाने के योग्य नहीं बना पाया है। इसके चलते दर्जनों गांवों के बाशिंदों को मुश्किलों का सामना करना पड़ा रहा है।
ग्रामीण कई बार इस मार्ग को विभाग व प्रदेश सरकारों से चौड़ा करने की मांग कर चुके हैं। मार्ग बस चलने योग्य न होने के कारण मजबूरन ग्रामीणों को निजी वाहनों का सहारा लेना पड़ता है और निजी वाहनों में भारी भरकम किराया अदा करना पड़ता है।
लोगों का कहना है कि चुनाव के दौरान हर राजनीतिक दल आश्वासन दे जाते हैं कि मार्ग पर जल्द बस चलाई जाएगी। उनके आश्वासन अभी तक कोरे ही साबित हुए हैं। सड़क मार्ग पर बस न चलने के कारण ग्रीमा, सिंयूर पंचायतों की आठ हजार की आबादी को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
इन पंचायतों के चलेड़, ग्रीमा, दयोकी, भासण गांवों के लोगों को कई दफा पैदल सफर करना पड़ता है। विभाग ने जीप योग्य मार्ग को भरमौर व मच्छेतर से जोड़ दिया है। ग्रामीण इस मार्ग को बस योग्य देखना चाहते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि इसके बाद बनी सड़कों पर बसें चल रही हैं। भरमौर-ग्रीमा सड़क पर आज भी जीप ही दौड़ती है। भरमौर का यह एकमात्र ऐसा मार्ग है जो 42 वर्षों बाद भी चौड़ा नहीं हो पाया है।
संजीव कुमार, केवल, मदन, कालीचरण, तिलक, प्रेम, चतरो राम, प्रह्लाद, सुनील, अनूप आदि ग्रामीणों ने वनमंत्री ठाकुर और वन विभाग से मांग की है कि इस मार्ग को जल्द चौड़ा किया जाए।