चंबा। बलोठ पंचायत के चार गांवों पर भूस्खलन का खतरा मंडरा रहा है। हालात यह हैं कि इन गांवों के ग्रामीण बलोठ पंचायतघर और मिडिल स्कूल उसलाड़ में शरण लेकर रातें काटने के लिए मजबूर हैं। दो दिन से सेरघार से निरंतर भूस्खलन हो रहा है। इससे ग्रामीण काफी सहम गए हैं। वे दिन के समय तो अपने घरों और खेतों में कामकाज निपटा रहे हैं लेकिन रात को मजबूरन पंचायतघर और स्कूल का रुख करने को विवश हैं। ग्रामीणों में रोष है कि प्रशासन को इसके बारे में अवगत करवाने बावजूद समस्या का समाधान नहीं करवाया जा रहा है।
ग्रामीणों नैणसुख, सौरमा राम, तिलक राज, रावण, प्रहलाद, भगत राम, छोटू, देवराज, शक्ति प्रसाद आदि ने बताया कि दो वर्ष पहले भी बारिश के दौरान सेरघार से भूस्खलन हुआ था। पहाड़ी से होने वाले भूस्खलन के कारण ग्रामीणों की उपजाऊ जमीन को नुकसान पहुंचा। इसके बाद बाकायदा ग्रामीणों का प्रतिनिधिमंडल उपमंडलाधिकारी से मिला। ग्रामीणों ने पहाड़ी से हो रहे भूस्खलन का स्थायी निदान करने की मांग उठाई जिस पर उन्हें समस्या का समाधान करवाने का आश्वासन दिया गया। ऐसे में अब बीते दो दिन से पहाड़ दरकने से एक बार फिर हालात बदतर हो गए हैं। गांव सेर, उखवाड़, अखल, द्रोथ और मलोड़ के 400 ग्रामीणों को अपनी और बच्चों की जान बचाने के लिए पंचायतघर और स्कूल भवन में शरण लेनी पड़ रही है। वहीं, दूसरी ओर मवेशियों को खुले जंगलों में छोड़ना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने प्रशासन की ओर से समस्या का समाधान करवाने की मांग की है।
पंचायत प्रधान बलोठ देवराज ने बताया कि सेरघार से भूस्खलन हो रहा है। मजबूरन चार गांवों के लोगों को पंचायतघर और स्कूल में शरण लेनी पड़ रही है। उन्होंने प्रशासन से समस्या का स्थायी समाधान करवाने की मांग की है। उपमंडलाधिकारी नागरिक अरुण शर्मा ने बताया कि मामला ध्यान में लाया गया है। शीघ्र प्रभावित गांवों का दौरा किया जाएगा।