साहो (चंबा)। जिला मुख्यालय चंबा से महज पंद्रह किलोमीटर दूरी पर स्थित सराहण पंचायत के दर्जनभर गांवों के बीमार लोगों के लिए आज भी पालकी या पीठ ही सहारा है। शुक्रवार को चपलाह निवासी नरेश कुमार को हृदय में असहनीय पीड़ा हुई। नरेश की बिगड़ती हालत को देखते हुए परिजन और ग्रामीणों ने उसे पीठ पर उठाकर चार किलोमीटर तक घने जंगल के बीच से बने ऊबड़-खाबड़ रास्ते से सड़क तक पहुंचे। इसके बाद निजी वाहन के जरिये उसे मेडिकल कॉलेज चंबा पहुंचाया गया। जहां से मरीज की तबीयत को देेखते हुए टांडा मेडिकल कॉलेज के लिए रेफर कर दिया गया। सड़क सुविधा के अभाव में ग्रामीणों और विशेषकर स्कूली बच्चों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। कहने को तो गांवों को सड़क सुविधा से जोड़ने के लिए नेताओं और विभागीय अधिकारियों की ओर से बड़े-बड़े वायदे किए गए लेकिन ये वायदे महज वायदों तक ही सिमट कर रह गए हैं।
देश आजादी का 75वां वर्ष मना रहा है लेकिन सराहन पंचायत के दर्जनों गांव बाहरेई, चपलाह, चलाट, खलेरा, पडूण, अपर घतरेड़, उपरली भूईं और घतरेड़ गांव आज भी सड़क सुविधा से वंचित हैं। सड़क न होने की वजह से बीते मंगलवार को भी गांव चपलाह की एक महिला की मृत्यु समय पर इलाज न होने (अस्पताल न पहुंचने) से हो गई और इससे पहले भी कई ऐसे हादसे हो चुके हैं। यहां सड़क सुविधा न होने के कारण बीमारी और गर्भावस्था की स्थिति में पालकी और खच्चरों के सहारे सड़क तक पहुंचने में घंटों लग जाते हैं। नतीजतन, समय पर उपचार न मिलने से लोग अपनी जिंदगी से हाथ धो बैठते हैं। ग्रामीणों नवीन कुमार, लक्की, विक्की, सुरेश कुमार, कुलदीप कुमार, विजय कुमार और पंकज ने बताया कि सड़क के अभाव में लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। कहा कि ग्रामीणों को गांव तक भाग्य रेखाएं पहुंचाने के लिए अपने स्तर पर भी योगदान देना चाहिए। उन्होंने विभागीय अधिकारियों से लोगों के साथ सामंजस्य स्थापित करवाकर सड़क निर्माण के लिए प्रयास करने की मांग की है।
लोक निर्माण विभाग के कनिष्ठ अभियंता नितिन महाजन ने बताया कि फोरेस्ट केस बनाकर स्वीकृति के लिए भेजा गया है। ग्रामीण सड़क निर्माण के लिए अपनी जमीन विभाग के नाम करते हैं तो इस कार्य को जल्द करवाने का प्रयास किया जा सकता है।