तुन्नूहटटी (चंबा)। कचनार ... ऐसा नाम जिसे सुनते ही लजीज पकौड़ों की याद आ जाती है। ग्रामीण क्षेत्रों में कचनार की सब्जी को लाेग खूब पसंद करते हैं।
इसकी फलियों की सब्जी और इसके पत्तों से बनाए पकौड़े स्वादिष्ट होते हैं। चटनी, दही में तैयार कर सब्जी, रायता के साथ कचनार का आचार भी बनाया जाता है। कचनार औषधीय गुणों से भरपूर होती है। माना जाता है कि यह अस्थमा, अलसर, दांतों के दर्द, सूजन, दस्त, शुगर ग्रंथी रोगों के लिए रामबाण होती है। कचनार के पेड़ों पर इन दिनों खूब फूल खिले हैं। ग्रामीण क्षेत्रों के लोग पेड़ों से कचनार की फलियां और फूल उतारकर शहर में आकर बेचते हैं और अपनी आजीविका चलाते हैं। मार्च महीने में फूलों से लदने वाले इस पेड़ की पत्तियां, तना और फूल सभी उपयोगी हैं। औषधीय गुणों से भरपूर कचनार की कली से बनने वाली सब्जी को लोग काफी चाव से खाते हैं। लोग कचनार का अचार बनाकर इसे साल भर के लिए संग्रहित करके रखते हैं। आयुर्वेद विशेषज्ञ की मानें तो कचनार का सेवन जटिल से जटिल रोगों के उपचार के लिए भी सार्थक सिद्ध होता है। कचनार के पेड़ चंबा जिले के तुन्नूहटटी समेत आस-पास के क्षेत्रों में पाए जाते हैं। स्थानीय बोली में इसे कराल भी कहा जाता है। इसका सेवन सेहत के लिए काफी गुणकारी माना जाता है।
उपमंडलीय आयुष चिकित्सा अधिकारी तुन्नूहटटी डॉ. सोनिया ने बताया कि कचनार पौष्टिक और औषधीय गुणों से भरपूर होती है। इसका इस्तेमाल जटिल से जटिल रोगों के उपचार के लिए भी सार्थक सिद्ध हुआ है। अस्थमा, अलसर, स्त्री रोग, दांतों के दर्द, सूजन, दस्त, शुगर ग्रंथी रोग और खून संबंधी रोगों को दूर करने के लिए भी इसका उपयोग किया जाता है। इसके सार्थक परिणाम सामने आए हैं।