चंबा। जिले के जंगलों में अब लॉट की आड़ में पेड़ों का अवैध कटान नहीं होगा। इसके लिए वन विभाग ने विशेष योजना बनाई है।
जहां भी लॉट जारी होगा, वहां पेड़ों की सही निशानदेही की जांच करने के लिए दूसरी रेंज के कर्मचारियों की टीम को भेजा जाएगा। यह टीम लॉट में कटने वाले पेड़ों की निशानदेही की रिपोर्ट बनाकर वनमंडलाधिकारी को सौंपेगी। संबंधित रेंज की टीम भी अपनी रिपोर्ट बनाकर भेजेगी। इस तरह एक रेंज के कर्मचारी दूसरी रेंज में होने वाले लॉट पर नजर रख पाएंगे। इसके बाद लॉट के तहत पेड़ों का काटने का कार्य शुरू होगा। इस तरह जंगलों में अवैध कटान होने की संभावना कम हो जाएगी। वनमंडलाधिकारी भी लॉट में जाकर जांच पड़ताल करेंगे। जिस भी जंगल में निगम को लॉट जारी होगा, उसमें नियमानुसार पेड़ों में हैंबर और खुदाई की जाएगी। इसके लिए संबंधित रेंज के अधिकारी अपनी भूमिका निभाएंगे। पेड़ के नीचे और ऊपर दोनों तरफ खोदाई की जाएगी, जिससे पेड़ कटने के बाद पता चल सके कि यह पेड़ लॉट में काटने के लिए चिह्नित हुआ था या नहीं।
जिले के जंगलों में जहां भी लॉट जारी हुआ है, वहां अकसर अवैध कटान के मामले सामने आए हैं। इसके चलते वन विभाग ने अवैध कटान रोकने के लिए विशेष योजना बनाई है। इस योजना के अनुसार लॉट में उन्हीं पेड़ों को काटा जाएगा, जो काटने के लिए चिह्नित किए जाएंगे। इसके अलावा यदि कोई हरा पेड़ काटता है तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इसमें विभागीय लापरवाही मिलने पर कर्मचारियों के साथ कोई नर्मी नहीं बरती जाएगी। जिस कर्मचारी की अवैध कटान में लापरवाही पाई जाएगी, उसके खिलाफ भी नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
मुख्य वन अरण्यपाल अभिलाष दोमदरन ने बताया कि लॉट की आड़ में होने वाले अवैध कटान को रोकने के लिए विभाग ने विशेष योजना तैयार की है। इसमें सबसे प्रथम पेड़ों की दोनों तरफ खुदान करना अनिवार्य रहेगा। इसके साथ जहां पर लॉट लगेगा, वहां दूसरी बीट की टीम निरीक्षण के लिए जाएगी।
एक लॉट में 100 से 1000 तक होती है पेड़ों की संख्या
जंगल में लॉट लगाने से पहले वन विभाग सूखे पेड़ों की गिनती करता है। इसमें पेड़ों की संख्या 100 से लेकर 1000 तक हो सकती है। इन पेड़ों की निशानदेही कर वन निगम को उन पेड़ों को काटने का लॉट दिया जाता है। इसी लॉट के तहत चिह्नित होने वाले पेड़ों को वन निगम काटकर अपने डिपुओं में पहुंचाता है। यहां से इमारती लकड़ी के रूप में इसे लोगों में आवंटित किया जाता है।