भजोत्रा पंचायत के सड़क से महरूम गांव।संवाद
सलूणी/तेलका (चंबा)। आजादी के 76 साल बाद भी हिमाचल में कई ऐसे इलाके हैं, जहां मूलभूत सुविधाओं के अभाव में लोगों की जान तक चली जाती है। इंटरनेट और सूचना क्रांति के इस दौर में सलूणी विधानसभा क्षेत्र की भजौत्रा पंचायत के पोठा गांव की महिला और नवजात बच्चे की मौत हो गई।
दरअसल, सड़क सुविधा न होने के कारण महिला को समय पर उपचार नहीं मिल पाया। पोठा गांव निवासी 22 वर्षीय अनुराधा पत्नी पृथ्वी सिंह घर में गिरने के कारण बेहोश हो गई थीं। वह आठ माह की गर्भवती थीं। बीते मंगलवार को दोपहर 12:00 बजे घर में काम करते समय महिला को चक्कर आ गया था। महिला को पृथ्वी सिंह और परिवार के सदस्य पालकी में उठाकर जैसे-तैसे दो किलोमीटर दूर चंबा-गिरझिंडु सड़क तक ले आए। सड़क पर पहुंचने के बाद परिजनों ने देखा कि महिला ने बेहोशी की हालत में पालकी में ही बेटे को जन्म दे दिया है। नवजात की मौत हो चुकी थी।परिजनों ने मृत नवजात को (पालकी) में ही घर भेज दिया और महिला को सालवां ले आए, लेकिन पीएचसी में डॉक्टर न होने से महिला को लेकर तेलका (सालवां) से मेडिकल कॉलेज चंबा के लिए रवाना हुए। करीब 6:15 बजे चंबा मेडिकल कॉलेज पहुंचे। ईसीजी परीक्षण के बाद एमओ चंबा ने 6:38 बजे महिला को मृत घोषित करार दिया।
उधर, इस घटना के बाद विकास के ढोल पीटने वाली सरकारों के दावों की भी पोल खुल गई है। चुनावों के दौरान राजनेता भी विकास के बड़े-बड़े दावे करते हैं, लेकिन बाद में होता कुछ नहीं। उधर, कार्यवाहक चिकित्सा अधीक्षक डॉ. देवेंद्र कुमार ने बताया कि मेडिकल कॉलेज चंबा पहुंचाने से पहले महिला की मौत हो चुकी थी।