चंबा। जिले में सर्पदंश के मामलों में बढ़ोतरी को देखते हुए अब यह पता लगाया जाएगा कि यहां कितनी प्रजातियों के सांप पाए जाते हैं और उनमें से कितने जहरीले हैं। यह कार्य इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) और एम्स के सहयोग से किया जाएगा। स्थानीय निवासी और अनुभवी स्नेक रेस्क्यूअर वीरेंद्र और सैम को इस जिम्मेदारी के लिए चुना है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. बिपिन ठाकुर ने बताया कि बरसात के मौसम में सांपों के बिलों में पानी भरने से वे रिहायशी इलाकों की ओर रुख करते हैं, जिससे सर्पदंश के मामले तेजी से बढ़े हैं। ऐसे में यह सर्वे अत्यंत आवश्यक हो गया है।
इस कार्य के लिए स्वास्थ्य विभाग के उपनिदेशक डॉ. उमेश भारती, डॉ. अर्जुन साथीश और कोची स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस की प्रोजेक्ट रिसर्च साइंटिस्ट अमृता द्वारा वीरेंद्र और सैम का चयन किया है। सर्वे के दौरान कोबरा, करैत और रसेल वाइपर सहित अन्य प्रजातियों की पहचान की जाएगी। उन्होंने लोगों से अपील की कि सर्पदंश की स्थिति में देसी टोटकों पर समय बर्बाद न करें, बल्कि मरीज को तुरंत अस्पताल लाएं। जिले के सभी प्रमुख अस्पतालों में एंटी स्नेक वेनम की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की गई है।
सीएमओ कार्यालय में घुसा सांप
बुधवार को सीएमओ कार्यालय के सभागार में भी एक सांप घुस आया था, जिसे सैम ने सुरक्षित रेस्क्यू कर जंगल में छोड़ा। यह घटना बताती है कि सांप अब आमतौर पर नजर आने लगे हैं और इससे सतर्कता बरतना जरूरी है।