चंबा में चरपट नाथ छड़ी यात्रा के दौरान प्रशासनीक अधिकारी और सेवादार।संवाद
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भरमौर (चंबा)। वर्ष में एक बार ही मणिमहेश आने वाले श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों को चौरासी सिद्धों और नौ नाथों के संपूर्ण दर्शन करने का मौका मिलता है। वैसे तो भरमौर में 84 सिद्ध और आठ नाथ हैं। इनमें नौवां नाथ चंबा का चरपट नाथ है जो केवल राधा अष्टमी के अवसर पर आयोजित होने वाले बड़े न्हौण (स्नान) के लिए पहुंचते हैं। उसी रात को चरपट नाथ चौरासी परिसर में एक रात के लिए डेरा डालते हैं। इस दौरान चौरासी परिसर में 84 सिद्ध और नौ नाथों का समूह पूर्ण होता है।
गौरतलब है कि वैश्विक महामारी कोरोना के बाद एक बार फिर मणिमहेश यात्रा में असंख्य श्रद्धालु पहुंचना शुरू हो गए हैं। दो साल के बाद श्रद्धालुओं को कई तीर्थ, सिद्धों और नाथों के दर्शन करने का मौका मिल रहा है। मणिमहेश यात्रा के दौरान भरमौर से आगे की चढ़ाई के दौरान श्रद्धालुओं में जोश बनते ही दिखता है।
चौरासी परिसर में स्थित 84 सिद्ध और नौ नाथ एक साथ विराजमान होते हैं। सोमवार को भरमौर के स्थानीय ग्रामीण और सैकड़ों श्रद्धालु इस शुभ घड़ी के गवाह बने। भरमौर के चौरासी परिसर में धर्मराज का मंदिर, लखना माता मंदिर, नर सिंह मंदिर, नंदी समेत कई छोटे-बड़े मंदिर हैं लेकिन चंबा से आने वाले चरपट नाथ का आशीर्वाद लोगों को मात्र मणिमहेश के दौरान ही मिलता है।
पुजारी पंडित हरिशरण शर्मा और पंडित लक्ष्मण दत्त शर्मा बताते हैं कि में चरपट नाथ के चौरासी परिसर में पहुंचने पर श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों को एक साथ चौरासी सिद्घों और नौ नाथों के दर्शन करने का मौका मिलता है।