रक्षाबंधन पर बहनों को खूब भा रहीं ब्रेसलेट-स्टाइल और रुद्राक्ष की राखियां
बच्चों के लिए स्पाइडर-मैन और स्पिनर डिजाइन वाली राखियां पहुंचीं बाजार में
पारंपरिक स्वदेशी रेशमी धागे और चांदी की राखियों का भी क्रेज बरकरार
मोहम्मद अयूब
चंबा। रक्षाबंधन की आहट के साथ बाजारों में राखियों ने रंग, अंदाज और स्टाइल बदल लिया है। इस बार भाई की कलाई पर सिर्फ धागा नहीं, बल्कि फैशन का नया ट्रेंड भी सजने जा रहा है।
कहीं ब्रेसलेट-स्टाइल राखियां युवतियों को आकर्षित कर रही हैं तो कहीं रुद्राक्ष और मेटल की राखियां पारंपरिक आस्था के साथ आधुनिक लुक दे रही हैं। कुंदन वर्क की चमकदार राखियां भी बहनों की पसंद बन रही हैं। बच्चों की कलाई पर स्पाइडर-मैन, स्पिनर और कार्टून कैरेक्टर वाली राखियां त्योहार का उत्साह दोगुना कर रही हैं। खास बात यह है कि नए डिजाइनों की चमक के बीच स्वदेशी रेशमी धागे और चांदी की राखियों का पारंपरिक आकर्षण अब भी कायम है।
दुकानदारों के अनुसार, बच्चों की पसंद को ध्यान में रखते हुए कार्टून और खिलौना आधारित राखियों के कई डिजाइन उपलब्ध हैं। पारंपरिक स्वदेशी रेशमी धागे वाली राखियों का क्रेज भी बरकरार है। सादगी और पारंपरिक अंदाज पसंद करने वाले लोग ऐसी राखियों की खरीदारी कर रहे हैं। चांदी की ब्रेसलेट वाली राखियां भी ग्राहकों की पसंद बनी हुई हैं। बाजार में इस बार फैंसी राखियों के डिजाइन और वैरायटी पर खास जोर है। दुकानदारों को रक्षाबंधन नजदीक आने के साथ बिक्री में और तेजी आने की उम्मीद है।
ब्रेसलेट-स्टाइल की राखियां युवाओं और महिलाओं की पहली पसंद बनी हुई हैं। इनमें आकर्षक डिजाइन और रंगों की कई वैरायटी उपलब्ध हैं। रुद्राक्ष और मेटल से तैयार राखियों की भी अच्छी मांग है। - गौरव कुमार
बच्चों के लिए भी बाजार में कई तरह की आकर्षक राखियां पहुंची हैं। स्पाइडर-मैन और स्पिनर डिजाइन वाली राखियों को बच्चे काफी पसंद कर रहे हैं। कार्टून कैरेक्टर और रंग-बिरंगे डिजाइन वाली राखियां भी खूब लुभा रही हैं। - रोहित कुमार
भाई की कलाई में बांधने के लिए इस बार कोई अलग और खास राखी लेना पसंद करूंगी ताकि यह राखी भाई को देखते ही पसंद आए। साल में एक बार यह त्योहार आता है, इसलिए इसे खास बनाना चाहती हूं। - मीनाक्षी कुमारी
राखी केवल एक धागा नहीं, बल्कि भाई-बहन के रिश्ते और स्नेह का प्रतीक है। यही वजह है कि इस बार मैं ऐसी राखी चुनना चाहती हूं जो भाई की कलाई पर बंधने के बाद लंबे समय तक याद रहे। - चंपा कोपड़ा