चंबा। मशहूर राजमा का मदरा लोगों के दिल को धोखा दे रहा है। स्वाद के चक्कर में दिल मरीज बन रहा है। यह बात मेडिकल कॉलेज चंबा में हृदय रोगियों की जांच के लिए राज्य के सबसे बड़े स्वास्थ्य संस्थान इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (आईजीएमसी) शिमला से पहुंचे विशेषज्ञ एवं गोल्ड मेडलिस्ट डॉ. राजीव मारवाह ने कही।
विशेष बातचीत में उन्होंने कहा कि वह नौ साल से चंबा आकर मरीजों की जांच कर रहे हैं। मरीजों की बढ़ती संख्या देखकर काफी चिंतित हूं। शिमला में भी उनके पास चंबा के काफी मरीज हृदय बीमारी का इलाज करवाने के लिए पहुंचते हैं। उन्होंने कहा कि पुराने समय में धाम (शादी और अन्य कार्यक्रमों में परोसा जाने वाला विशेष भोजन) को एक सामाजिक मेल-मिलाप का जरिया बनाया गया था। इसमें सभी वर्गों के लोग एक साथ मिलकर भोजन करते थे। इस दौरान बोटी (रसोइया) एक कड़छी मदरे की डालता था। इसके बाद लोग दोबारा उस मदरे को नहीं खाते थे। मौजूदा समय में लोग धाम में मदरा खाने के बाद इसे पैक कर घर भी ले जाते हैं। घर पर भी मदरा बनाकर खाते हैं। इसका सीधा असर उनके दिल पर पड़ता है। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया में कुछ लोग लहसुन, अदरक और प्याज से दिल की बीमारी को ठीक करने का दावा करते हैं। ऐसा बिलकुल नहीं होता। हृदय रोग नसाें में कोलेस्ट्रॉल जमने से होता है। इसका उपचार दवाई या अन्य इलाज से ही हो सकता है।
बुजुर्गों से ज्यादा युवा बीमारी की चपेट में
डॉ. मारवाह ने कहा कि खराब खान-पान से चंबा में हृदय रोग के मरीजों की संख्या काफी बढ़ रही है। बुजुर्गों से ज्यादा युवा इस बीमारी की चपेट में आ रहे हैं। लोगों को रहन-सहन के साथ खान-पान में बदलाव लाने की जरूरत है। तीस साल की उम्र के बाद रूटीन तौर पर बीपी, शुगर और अन्य स्वास्थ्य जांच करवानी चाहिए।
घी में तैयार किया जाता है मदरा
मदरा घी में बनाया जाता है। इसे रोजाना या अधिक मात्रा में खाने से कोलेस्ट्रोल बढ़ने की आशंका बढ़ जाती है। यह दिल की बीमारी का मुख्य कारण है। आज के दौर में हर ढाबे में रोजाना लोगों को यह व्यंजन खिलाया जा रहा है। घी युक्त व्यंजन खाने के उपरांत व्यक्ति उस हिसाब से सैर भी नहीं करता है। हृदय रोग में बच्चों को बाहर का खाना, फास्ट फूड, लेज, कुरकुरे सहित अन्य बाहरी खाना हृदय रोग के कारक बन सकते हैं।