चंबा। जिले में हृदय रोग विशेषज्ञ (कार्डियोलॉजिस्ट) की लंबे समय से चली आ रही कमी अब मरीजों पर भारी पड़ रही है। तीन दिन में दो लोगों की हृदय गति रुकने से मौत हो गई। इनमें एक युवा और एक व्यस्क शामिल हैं। इन्हें गंभीर अवस्था में मेडिकल कॉलेज चंबा लाया गया था, लेकिन उन्हें हृदय रोग विशेषज्ञ की सेवाएं नहीं मिल पाईं। इसके चलते उनका निधन हो गया। यदि वहां पर कोई विशेष विशेषज्ञ मौजूद होता तो इन लोगों की जिंदगी बच भी सकती थी।
मेडिकल कॉलेज को छह वर्ष हो चुके हैं, लेकिन आज तक यहां कोई भी सरकार हृदय रोग विशेषज्ञ की तैनाती नहीं कर पाई है। मौजूदा सरकार यहां रोबोट सर्जरी शुरू करने की बातें कह रही है, लेकिन हृदय की बीमारी से जिले में आए दिन किसी न किसी की मौत हो रही है। ऐसे में यहां सबसे ज्यादा आवश्यक हृदय रोग विशेषज्ञ की तैनाती है।
स्थानीय निवासी संजय शर्मा, जय सिंह, विनोद कुमार, राहुल, मनोज कुमार, चैन सिंह, नेक सिंह ठाकुर, महिंद्र सिंह और शम्मी कुमार ने बताया कि सरकार ने यहां मेडिकल कॉलेज तो खोल दिया है, लेकिन हृदय रोग विशेषज्ञ के बिना यह कॉलेज अधूरा है। जिले में ऐसे कई मरीज होंगे, जिन्हें अपनी हृदय की बीमारी के बारे में जानकारी ही नहीं है। ऐसे में यदि कोई विशेषज्ञ यहां नियुक्त होगा तो ऐसे लोग हृदय की समस्या होने पर जांच के लिए विशेषज्ञ के पास जा सकते हैं। इससे उन्हें जहां अपनी बीमारी का पता लगेगा तो वहीं इलाज की सुविधा भी मिलेगी। चंबा से हृदय रोगियों को ऐन मौके पर टांडा मेडिकल कॉलेज रेफर किया जा रहा है। इस संबंध में मेडिकल कॉलेज चंबा के प्रवक्ता डॉ. मानिक सहगल ने बताया कि हमने सरकार से हृदय रोग विशेषज्ञ की नियुक्ति के लिए मांग भेजी है।