चंबा। जिले में 56 आयुर्वेदिक स्वास्थ्य केंद्रों में लोगों को आयुर्वेदिक चिकित्सा की सुविधा नहीं मिल रही है। इन स्वास्थ्य केंद्रों में सेवाएं देने के लिए कोई भी आयुर्वेदिक चिकित्सक तैनात नहीं है। इसकी वजह से संंबंधित क्षेत्र के लोगों को आयुर्वेदिक चिकित्सा से इलाज करवाने के लिए भटकना पड़ रहा है। कई स्वास्थ्य केंद्र ऐसे भी हैं जहां पर चिकित्सक न होने के कारण ताले लटके हुए हैं जबकि अधिकतर में आयुर्वेदिक फार्मासिस्ट मरीजों का इलाज कर रहे हैं। जिले में आयुर्वेदिक विभाग में 112 आयुर्वेदिक चिकित्सक के पद स्वीकृत हैं। इनमें से 56 पद खाली हैं। इसको लेकर सरकार को विभाग कई बार अवगत भी करवा चुका है लेकिन अभी तक सरकार ने जिले में रिक्त पदों को भरने के लिए कोई सकारात्मक कदम नहीं उठाए हैं। इसकी वजह से जिले के अधिकतर आयुर्वेदिक स्वास्थ्य केंद्रों में चिकित्सकों के पद खाली पड़े हैं।
जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोग अपनी बीमारी का इलाज करवाने के लिए आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति को ज्यादा तरजीह देते हैं। क्योंकि ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य केंद्रों की काफी कमी रहती है। ग्रामीणों अशोक कुमार, हंसराज, रवि कुमार, चैन लाल, सुरेंद्र, भाग सिंह, टेक चंद और मनोज कुमार ने बताया कि सरकार जहां आयुर्वेदिक चिकित्सा को बढ़ावा देने के लिए बड़ी घोषणाएं कर रही हैं। वहीं आयुर्वेदिक स्वास्थ्य केंद्रों में रिक्त चिकित्सकों के पद भरने के लिए कोई कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। आज के परिवेश में लोगों का एलोपैथिक चिकित्सा प्रणाली के बजाय आयुर्वेदिक चिकित्सा की तरफ अधिक रुझान बढ़ने लगा है क्योंकि आयुर्वेदिक दवाइयों से इंसान के शरीर पर कोई बुरा प्रभाव नहीं पड़ता लेकिन स्वास्थ्य केंद्रों में चिकित्सक नहीं होने के कारण लोगों को परेशानी हो रही है। जिला आयुर्वेदिक अधिकारी डॉ. किरण शर्मा ने कहा कि जिले में चल रही आयुर्वेदिक चिकित्सकों की कमी के बारे में सरकार को अवगत करवाया जा चुका है।