चंबा। पहले सोचती थी कि मैं क्या कर सकती हूं... लेकिन अब लगता है कि अगर हिम्मत हो तो कुछ भी असंभव नहीं। यह कहते हुए शहर के स्वयं सहायता समूह की सदस्य राजिंद्रा देवी की आंखों में आत्मविश्वास झलक उठता है। इस समूह से जुड़ीं जिले की 100 से अधिक महिलाएं आज आत्मनिर्भरता की नई कहानियां लिख रही हैं।
कुछ साल पहले तक ये महिलाएं घर और परिवार की जिम्मेदारियों तक सीमित थीं, लेकिन राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन (एनयूएलएम) के तहत गठित स्वयं सहायता समूह से जुड़ने के बाद उन्होंने अपने भीतर की क्षमता को पहचाना और अपनी दिशा खुद तय की।
किसी ने सिलाई-बुनाई केंद्र शुरू किया, किसी ने मसाला, अचार या पापड़ यूनिट लगाई तो किसी ने ब्यूटी पार्लर और फूड प्रोसेसिंग व्यवसाय को चुना। इन छोटे-छोटे प्रयासों ने अब बड़ा रूप ले लिया है। महिलाएं अब न सिर्फ अपने परिवार का आर्थिक सहारा बनी हैं बल्कि जिले की स्थानीय अर्थव्यवस्था में भी महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं।
एनयूएलएम योजना के तहत महिलाओं को ब्याजमुक्त या कम ब्याज पर ऋण, साथ ही व्यावसायिक प्रशिक्षण और मार्केट लिंकिंग की सुविधाएं मिल रही हैं। इससे उन्हें अपने सपनों को साकार करने के लिए आवश्यक आर्थिक और तकनीकी समर्थन मिला है।
स्वयं सहायता समूह की सदस्य सविता, संजीवना देवी, रंजना देवी, कौशल्या और नीलमा देवी ने बताया कि समूह से हमें सिर्फ पैसा नहीं, आत्मविश्वास और पहचान मिली है। अब हम अपनी मेहनत से अपनी पहचान बना रही हैं। समूहों में महिलाएं साझेदारी की भावना से काम करती हैं। कोई उत्पादन संभालती है, कोई बिक्री तो कोई मार्केटिंग का कार्य देखती है। लाभ का हिस्सा सभी को बराबर मिलता है, जिससे आपसी एकता और सहयोग बढ़ रहा है।
प्रशासन भी इन समूहों को डिजिटल प्रशिक्षण, स्थानीय मेलों में उत्पाद प्रदर्शन और बाजार विस्तार जैसे अवसर प्रदान कर रहा है, जिससे इनकी आजीविका को और सशक्त बनाया जा सके।