चंबा। वर्ष 2009 में अधिसूचित जिला चंबा के दो सरकारी स्कूलों की जमीन शिक्षा विभाग के नाम नहीं हो पाई है।
ट्रांजेक्शन कोड मेल न होने से यह मामला फंस गया है। हालांकि, शिक्षा विभाग ने अपनी तरफ से ट्रांजेक्शन कोड भेजकर फाइनल अप्रूवल के लिए मामला सरकार को भेज दिया है, मगर अभी तक कोई अपडेट नहीं मिला है। बहरहाल, मामले में अंतिम स्वीकृति सरकार देगी।
वर्ष 2009 में जिला चंबा के चार स्कूलों को मॉडल स्कूल बनाया जाना था। इसी वर्ष अधिसूचना भी जारी हुई। अधिसूचना जारी होने के बाद विभाग की ओर से एफसी क्लीयरेंस के लिए आवेदन किया गया। वन विभाग की भूमि होने के चलते जहां चयनित चार स्कूलों में दो स्कूलों को स्वीकृति मिल गई। अन्य दो स्कूलों का मामला अभी तक लटका है। ट्रांजेक्शन कोड मेल न होने के कारण यह नौबत आ रही है। विभाग नियमित तौर पर इस मामले को लेकर पत्राचार सरकार से कर रहा है। गौरतलब है कि राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला खुशनगरी और डांड स्कूल का मामला फंसा है। दो अन्य स्कूल राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला भड़ियांकोठी और जनजातीय क्षेत्र पांगी के तहत आती राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला हिलौर का मामला निर्धारित समय के अनुरूप हल हो गया है। इन स्कूलों को मॉडल का दर्जा मिल चुका है और इसी स्तर पर पढ़ाई भी हो रही है।
उच्च शिक्षा उपनिदेशक चंबा प्यार सिंह चाढ़क ने बताया कि यह मामला उनके ध्यान में है। ट्रांजेक्शन कोड मेल न होने से मामला अटका है। फाइनल अप्रूवल के लिए मामला भेजा गया है। इसके बाद ही कुछ कहा जा सकता है।