सलूणी (चंबा)। नागरिक अस्पताल सलूणी में शाम चार बजे के बाद ताला लटक जाता है। यहां रात को आने वाले मरीजों का इलाज करने के लिए कोई डॉक्टर नहीं है। अस्पताल को चार माह से एक ही डॉक्टर चला रहे हैं। वह दिन भर मरीजों की नब्ज टटोलने के बाद शाम को अपने आवास में चले जाते हैं। इसके बाद अस्पताल में सेवाएं देने के लिए कोई डॉक्टर नहीं रहता।
मरीजों को रात को स्वास्थ्य सेवाएं पाने के लिए 80 किलोमीटर दूर चंबा मेडिकल कॉलेज जाना पड़ता है। कई बार गंभीर रूप से बीमार मरीज इतना लंबा सफर तय नहीं कर पाता। इस कारण उसकी बीच रास्ते में ही मौत हो जाती है। अस्पताल में डॉक्टरों के सात पद स्वीकृत हैं। इनमें छह पद दो साल से खाली हैं। चार माह पहले दो डॉक्टर अस्पताल में थे, लेकिन इनमें एक डॉक्टर का तबादला सरकार ने दूसरी जगह कर दिया है।
परिचर्चा:-
जिस अस्पताल में मरीजों को पचास बिस्तर की सुविधा के साथ बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मिलनी चाहिए थीं, वहां मरीजों को रात के समय अपना इलाज करवाने तक की सुविधा नहीं मिल रही है। - मनु राणा
यदि सरकार नागरिक अस्पताल में डॉक्टरों के पद भर ही नहीं सकती थी तो सीएचसी का दर्जा बढ़ाकर स्थानीय लोगों को क्यों गुमराह किया गया। लोग आज भी स्वास्थ्य सेवाओं के लिए भटक रहे हैं। - पीयूष राणा
किसी भी सरकार ने नागरिक अस्पताल सलूणी में चल रही स्टाफ की कमी को पूरा करने में गंभीरता नहीं दिखाई। यही कारण है कि शाम होने के बाद सलूणी अस्पताल में ताला लटक जाता है। - खेम राज
समय रहते सरकार और विभाग ने सलूणी अस्पताल में डॉक्टरों की कमी को पूरा नहीं किया तो आने वाले समय में लोग सरकार का घेराव भी कर सकते हैं। इससे हालात खराब भी हो सकते हैं। - विनोद शर्मा
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉक्टर बिपन ठाकुर ने बताया कि अस्पताल में चल रही डॉक्टरों की कमी के बारे में सरकार को अवगत करवा दिया गया है। जल्द सरकार इन पदों पर डॉक्टरों की तैनाती कर सकती है।