मेडिकल कॉलेज में विशेषज्ञ चिकित्सक नहीं, हृदय रोगियों के इलाज का सहारा बने शिविर
कभी शिविर लगा तो सैकड़ों मरीजों की कतार, गंभीर रोगियों के लिए शिमला-टांडा ही रास्ता
संवाद न्यूज एजेंसी
चंबा। दिल की बीमारी मरीजों को कतार में खड़ा कर रही है और चंबा मेडिकल कॉलेज में उस कतार को संभालने वाला हृदय रोग विशेषज्ञ नहीं है। आकांक्षी जिले में जब भी निशुल्क हृदय जांच शिविर लगता है तो मरीजों की भीड़ उमड़ पड़ती है।
घंटों इंतजार के बाद बुजुर्ग, महिलाएं और गंभीर हृदय रोगी विशेषज्ञ से परामर्श पाने की कोशिश करते हैं। शिविरों में उमड़ती यह भीड़ जिले में हृदय रोगियों की संख्या से ज्यादा उस व्यवस्था की कहानी कहती है, जहां स्थायी उपचार के बजाय मरीजों को कभी-कभार लगने वाले शिविरों का इंतजार करना पड़ रहा है।
चंबा मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में ईसीजी और इको जैसी जांचें हो जाती हैं, लेकिन इनकी रिपोर्ट के आधार पर हृदय रोग की दवा और आगे का उपचार तय करने के लिए यहां एक भी हृदय रोग विशेषज्ञ तैनात नहीं है। नतीजा यह है कि गंभीर मरीजों को आईजीएमसी शिमला या टांडा मेडिकल कॉलेज का रुख करना पड़ता है। दूरदराज के क्षेत्रों से आने वाले मरीजों के लिए यह सफर बीमारी के साथ आर्थिक बोझ भी बढ़ा देता है। उधर, मेडिकल कॉलेज प्रवक्ता डॉ. मानिक सहगल ने बताया कि सरकार ने चंबा में हृदय रोग विभाग को मंजूरी दे दी है। जल्द ही इसमें विशेषज्ञों की तैनाती होने की उम्मीद है।
शिविर में सामने आती है असली तस्वीर
निशुल्क शिविरों में एक ही दिन बड़ी संख्या में मरीजों का पहुंचना इस बात का संकेत है कि जिले में हृदय रोगियों को नियमित विशेषज्ञ सेवा की जरूरत है। कई मरीज लंबे समय से बीमारी से जूझ रहे हैं और नियमित जांच, दवा तथा फॉलोअप के लिए विशेषज्ञ परामर्श चाहते हैं, लेकिन स्थायी सुविधा नहीं होने से उन्हें शिविर का इंतजार करना पड़ता है।
जांच की सुविधा, उपचार की कड़ी अधूरी
मेडिकल कॉलेज में जांच की सुविधा होने के बावजूद विशेषज्ञ की कमी उपचार की पूरी व्यवस्था को अधूरा छोड़ देती है। मरीजों की रिपोर्ट तैयार हो जाती है, लेकिन गंभीर स्थिति में आगे की चिकित्सकीय राय के लिए उन्हें दूसरे संस्थानों तक जाना पड़ता है। आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों के लिए यह सबसे बड़ी परेशानी है। कई मरीज किराये और दूसरे खर्च के कारण समय पर उपचार नहीं करा पाते।
आकांक्षी जिले के दावे पर बड़ा सवाल
आकांक्षी जिले में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने की कवायद के बीच हृदय रोग जैसी गंभीर बीमारी के लिए स्थायी विशेषज्ञ व्यवस्था का अभाव बड़ा सवाल है। मरीजों और परिजनों ने मेडिकल कॉलेज में हृदय रोग विशेषज्ञों की नियमित तैनाती जल्द करने की मांग की है।