समग्र शिक्षा में एसएमसी का कार्यकाल घटा, विकास कार्यों की कार्ययोजना अब भी तीन साल की
नए सदस्यों के सामने पुराने काम आगे बढ़ाने की चुनौती, स्वीकृति-बजट में देरी से पहले ही खिंचता है काम
समिति बदलने पर योजनाओं की निगरानी और निरंतरता पर मंडरा रहा संकट
पंकज सलारिया
चंबा। स्कूलों में विकास की निगरानी करने वाली समिति का कार्यकाल छोटा कर दिया गया, लेकिन विकास की योजना उतनी ही लंबी छोड़ दी गई है।
समग्र शिक्षा के तहत स्कूल प्रबंधन समितियों (एसएमसी) का कार्यकाल तीन साल से घटाकर दो साल कर दिया गया है, जबकि स्कूलों की विकास कार्ययोजना तीन साल की ही रहेगी। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि दो साल बाद बदलने वाली समिति तीसरे साल की योजनाओं को किस तरह आगे बढ़ाएगी।
एसएमसी स्कूल की जरूरतों के अनुसार विकास कार्य तय करने, उनकी प्राथमिकता निर्धारित करने और प्रगति की निगरानी में अहम भूमिका निभाती है। लेकिन स्कूलों में कई काम स्वीकृति, बजट और विभागीय प्रक्रिया के कारण लंबा समय लेते हैं। ऐसे में दो साल में समिति बदलने पर नई समिति को पुराने कार्यों और उनकी स्थिति समझने में ही समय लग सकता है।
एसएमसी सदस्यों अंजना देवी, रेखा देवी, पूर्ण चंद, राकेश कुमार और शमीम ने कहा कि कई विकास कार्य तय अवधि में पूरे नहीं हो पाते। यदि कार्ययोजना तीन साल की है और समिति दो साल में बदल जाती है तो योजनाओं की निरंतरता प्रभावित हो सकती है। नए सदस्यों को पहले से चल रहे कार्यों की जानकारी देने में भी समय लगेगा।
सदस्यों ने मांग की है कि एसएमसी के कार्यकाल और विकास कार्ययोजना की अवधि में समानता लाई जाए, ताकि समिति बदलने का असर स्कूलों के विकास कार्यों पर न पड़े। समग्र शिक्षा की जिला परियोजना अधिकारी उपमा शर्मा ने बताया कि इस वर्ष नए बदलाव किए गए हैं। इसी के तहत स्कूलों में स्कूल प्रबंधन समितियां कार्य करेंगी।