पशुओं के गले से टैग हटाकर जिले की सड़कों पर मवेशियों के लावारिस छोड़ रहे हैं पशुपालक
पांच गोसदन में 423 में मिला मवेशियों का सहारा, नहीं थम रहा लावारिस पशु छोड़ने का सिलसिला
रिंपी ठाकुर
चंबा। जिले में गोसदनों की छत तो बढ़ी लेकिन सड़कों पर बेसहारा मवेशियों की कतार कम नहीं हुई। पांच गोसदनों में 423 पशुओं को आश्रय मिलने के बावजूद जिम्मेदारी से बचने वाले पशुपालक गले से टैग हटाकर मवेशियों को खुले में छोड़ रहे हैं।
जिले में लावारिस मवेशियों की समस्या गंभीर होती जा रही है। पशुपालन विभाग बेसहारा पशुओं को सुरक्षित आश्रय देने के लिए पांच गोसदनों का संचालन कर रहा है। वहीं, कुछ पशुपालक जिम्मेदारी से बचने के लिए मवेशियों को खुले में छोड़ रहे हैं।
जिले के भगोत, हरदासपुरा, तुनुहट्टी, मंजीर और चुवाड़ी स्थित गोसदनों में 423 लावारिस मवेशियों का पालन-पोषण किया जा रहा है। भगोत में 25, हरदासपुरा में 43, तुन्नुहट्टी में 130, मंजीर में 125 और चुवाड़ी में 100 पशु रखे गए हैं। इन सभी पशुओं के चारे, पानी, स्वास्थ्य जांच और देखभाल की जिम्मेदारी पशुपालन विभाग निभा रहा है। इसमें एक लावारिस मवेशी के लिए हर माह 1200 रुपये निर्धारित है।
विभाग ने हाल ही में लिल्हकोठी क्षेत्र से भी लावारिस पशुओं को पकड़कर गोसदन में पहुंचाया। बावजूद इसके जिले के विभिन्न क्षेत्रों में सड़कों पर बेसहारा मवेशी घूमते दिखाई दे रहे हैं। ये पशु न केवल सड़क दुर्घटनाओं का कारण बन रहे हैं, बल्कि किसानों की फसलों को भी नुकसान पहुंचा रहे हैं और आम लोगों के लिए परेशानी का सबब बने हुए हैं।
पशुपालन विभाग के उपनिदेशक डॉ. राकेश भंगालिया ने बताया कि विभाग को जहां से भी लावारिस पशुओं की सूचना मिलती है, वहां तत्काल कार्रवाई कर उन्हें गोसदन में पहुंचाया जाता है। उन्होंने कहा कि कुछ लोग जानबूझकर पशुओं के पहचान टैग निकालकर उन्हें लावारिस छोड़ देते हैं जिससे उनकी पहचान करना कठिन हो जाता है।