चुराह की चार पंचायतों के लोग जान जोखिम में डालकर पार कर रहे दरिया
2004 में बने पुल की नहीं हुई मरम्मत, बरसात में बना रहता है हादसे का खतरा
संवाद न्यूज एजेंसी
चुराह (चंबा)। एक तरफ उफनता दरिया, दूसरी तरफ जरूरी कामों की मजबूरी... चुराह के ग्रामीणों के लिए यह डरावना सफर अब रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन चुका है। जर्जर पुल ने साथ छोड़ दिया है लेकिन लोहे के तार लोगों का दरिया पार करवा रहे हैं। चार पंचायतों के हजारों लोग बरसात के मौसम में हर कदम पर जान का जोखिम उठाकर इस खतरनाक रास्ते को पार कर रहे हैं।
चुराह उपमंडल में वर्ष 2004 में बना पैदल पुल जर्जर हालत में पहुंच गया है। इसके बाद दरिया पर कई छोटे पुल बनाए लेकिन हर बार बाढ़ की भेंट चढ़ गए। आज भी पंचायत शलेला बाड़ी, देहग्रा, भलोड़ी और आइल के लोगों की यही पुल जीवनरेखा बना है। बरसात के मौसम में पुल की हालत इतनी खराब हो जाती है कि लोगों को लोहे के तारों का सहारा लेकर जान जोखिम में डालकर इसे पार करना पड़ता है। ग्रामीणों ने कहा कि किसी बीमार का हालचाल पूछने या अन्य सामाजिक कार्यक्रम में शामिल होना हो तो मजबूरी में इस पुल से गुजरना पड़ता है।
उधर, सोमवार को इसी पुल को पार करते हुसैन मोहम्मद दिखाई दिए। उन्होंने बताया कि दो दिन पहले उनके ससुर का निधन हो गया था। उन्हें ससुराल जाना था। हाल ही में तेलउधर क्षेत्र में घास काटते समय दरिया में गिरी महिला के गांव बदेठी भी उन्हें जाना था। दोनों गांव दरिया के उस पार हैं। वहां पहुंचने के लिए इसी जर्जर पुल का सहारा लेना पड़ा। इस पुल से खैरना, भलोड़ी, मनसा, चंद्रोल, कुंडा, बंजवाड़ी, कच्चेला, सर, बदेठी और मकोला सहित कई गांवों के लोग आवाजाही करते हैं। एडीसी चंबा अमित मेहरा ने बताया कि पुल की मरम्मत करवाने को लेकर स्थानीय प्रशासन को निर्देश जारी किए गए हैं।