चंबा। मणिमहेश यात्रा के दौरान चौगान में श्रद्धालुओं के लिए किए गए प्रशासनिक इंतजाम शनिवार रात की बारिश में फेल हो गए। प्रशासन की ओर से लगाए गए टेंटों की छत से पानी टपकने लगा, जिससे उनमें ठहरे श्रद्धालु पूरी रात भीगते रहे। हालात ऐसे बने कि जम्मू-कश्मीर से पहुंचे ये श्रद्धालु छोटे बच्चों को भीगने से बचाने के लिए उन्हें गोद में उठाए रात भर बैठे रहे।
श्रद्धालुओं ने तिरपाल बिछाकर सोने की कोशिश की, लेकिन टपकते पानी से वह भी गीली हो गई। सुबह होते ही श्रद्धालुओं ने बाजार से नई तिरपाल खरीदकर टेंट के अंदर छत में लगाई और पानी बाहर निकालने की व्यवस्था की। श्रद्धालुओं ने इसे प्रशासन की लापरवाही बताते हुए सरकार से पुख्ता इंतजाम करने की मांग उठाई। उल्लेखनीय है कि शनिवार शाम जम्मू-कश्मीर से 150 श्रद्धालुओं की छड़ी चौगान में पहुंची थी और कुछ अन्य श्रद्धालु भी चौगान में रुके थे।
रात को बारिश शुरू हो गई। प्रशासन ने यहां टेंट लगाए थे, जिसे देख हम काफी संतुष्ट हुए, लेकिन जब रात को टेंट से पानी टपकने लगा तो उन्हें एहसास हुआ कि प्रबंधन के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति की गई है। सुनील गोस्वामी जेएंडके निवासी
मणिमहेश यात्रा पर दुनिया भर से श्रद्धालु आते हैं। पारंपरिक छड़ियां चौगान में पड़ाव डालने के बाद आगे बढ़ती हैं। इसके बारे में प्रशासन को भी पता है। उसके बावजूद इन श्रद्धालुओं के लिए चौगान में कोई पुख्ता इंतजाम नहीं किए गए। सुनील कुमार निवासी जेएंडके
पहले प्रशासन की तरफ से श्रद्धालुओं को रहने के लिए टेंट और खाना बनाने के लिए मिट्टी तेल भी उपलब्ध करवाया जाता था, लेकिन अब प्रबंधों के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति की जा रही है। श्रद्धालु अपने टेंट लगाकर चौगान में ठहरने को मजबूर हैं। कुलदीप कुमार जेएंडके निवासी
प्रशासन को पता होता है कि हर वर्ष मणिमहेश यात्रा में जेएंडके से छड़ी यात्राएं आती हैं, लेकिन हर बार उनकी व्यवस्था के लिए कोई भी प्रबंध यहां नहीं किए जाते। इसके लिए सरकार व प्रशासन दोनों जिम्मेदार है। इसके लिए वे वापस जाकर सरकार को पत्र लिखेंगे। श्याम लाल निवासी जेएंडके
चंबा टेंट में बारिश के बीच गीले टेंट में नौनिहालों संग बैठे श्रद्धालू।संवाद