चंबा। मन की बात सुनकर कड़ी मेहनत और लगन से यदि लक्ष्य की ओर बढ़ा जाए तो सफलता अवश्य मिलती है। ऐसा ही चूड़ी निवासी सुनीता देवी ने कर दिखाया है। आज वह हस्तशिल्प कला से न केवल खुद आत्मनिर्भर बनीं बल्कि 40 से अधिक महिलाओं के लिए रोजगार का रास्ता खोल दिया।
सुनीता ने चंबा कढ़ाई में निपुण होने के बाद कुशन, शीशे के रंगीन कवर, बर्थडे फ्रेम, सूट स्टिचिंग और पारंपरिक चंबा रुमाल जैसी वस्तुएं तैयार करना सीखा। आज उनके उत्पादों की मांग देश के कोने-कोने से है।
सुनीता ने औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (आईटीआई) चंबा से चंबा कढ़ाई और एंब्रॉयडरी का प्रशिक्षण लिया। इसके बाद उन्होंने दो वर्षों तक निजी संस्थान में युवतियों को प्रशिक्षित किया और सीटीआई (क्राफ्ट इंस्ट्रक्टर ट्रेनिंग) पंजाब से पूरी की। इसके बाद सुनीता ने हाथों से उत्पाद तैयार कर उनको ऑनलाइन बेचने का रास्ता अपनाया और आत्मनिर्भरता की ओर कदम बढ़ाया।
अब तक वह कई युवतियों और महिलाओं को सुई-धागे का हुनर निशुल्क सिखा चुकी हैं। उनके पिता ओम प्रकाश खेतीबाड़ी के साथ राजमिस्त्री का काम करते हैं, मां गिलमो देवी स्कूल में मिड-डे मील वर्कर हैं, जबकि भाई गुरुबचन सिंह निजी कंपनी में कार्यरत है। परिवार की मेहनत देखकर सुनीता ने भी ठान लिया कि वह अपने बलबूते परिवार का सहारा बनेंगी। अब वह परिवार खर्च में भी हिस्सा देती हैं।
ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से बढ़ा काम
सुनीता चंबा कढ़ाई और हाथों से बनाए उत्पादों की तस्वीरें सोशल मीडिया पर साझा करती हैं। इससे उन्हें जिला, प्रदेश और बाहरी राज्यों से भी ऑर्डर मिलने लगे हैं। ऑनलाइन मांग बढ़ने से उनका काम अब घर बैठे आत्मनिर्भरता का उदाहरण बन गया है।
अगर इरादा मजबूत हो और मेहनत सच्चे दिल से की जाए तो हर सपना पूरा किया जा सकता है। सुनीता