चंबा। कृषि विभाग किसानों को यूरिया खाद की जगह खेतों में अब नैनो यूरिया खाद का छिड़काव करने की सलाह दे रहा है। कृषि विभाग का दावा है कि इससे मक्की की फसल की पैदावार में बढ़ोतरी होगी। विभाग ने साफ किया है कि यूरिया खाद की अपेक्षा नैनो यूरिया खाद मक्की के लिए काफी लाभप्रद साबित होती है। अब क्षेत्र के किसान यूरिया खाद न मिलने पर नैनो यूरिया खाद का ही इस्तेमाल करने लगे हैं।
गौर रहे कि जिले के 32 हजार हेक्टेयर भूमि पर मक्की की पैदावार होती है। जिले के सलूणी, तीसा, चंबा और मैहला में मक्की की अधिक पैदावार होती है। सलूणी और तीसा के किसान मक्की को बाहरी मंडियों में बेचने के लिए भी भेजते हैं। विभागीय अधिकारियों की मानें तो यूरिया खाद की 50 किलोग्राम की बोरी के बराबर ही एक लीटर नैनो यूरिया खाद का उपयोग किया जा सकता है। इसके लिए सर्वप्रथम स्प्रे पंप होना आवश्यक है। इस खाद की विशेषता यह रहेगी कि स्प्रे मक्की के पत्तों में होगी और ये पत्तों के अंश तक पहुंचेगी। जबकि, यूरिया खाद का हाथों से छिड़काव करने पर ये पत्तों समेत जमीन पर भी गिरती है। बारिश न होने तक इसका उपयोग नहीं हो पाता है। बहरहाल, विभाग नैनो यूरिया खाद का अधिक से अधिक उपयोग करने की किसानों को सलाह दे रहे हैं। कृषि विभाग के उपनिदेशक कुलदीप धीमान ने खबर की पुष्टि की है। बताया कि यूरिया खाद की अपेक्षा नैनो यूरिया खाद अधिक लाभप्रद साबित होती है।