चंबा। स्मार्ट मीटर सिर्फ बिजली की खपत मापने का एक डिवाइस है, ठीक वैसे ही जैसे पारंपरिक मीटर होता है। यह किसी भी तरह से टैरिफ दरों या बिलिंग नीतियों को नहीं बदलता है। यह बात विद्युत बोर्ड के सलाहकार अनुराग पराशर ने कही।
उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर चल रहा विरोध और गुमराह करने वाली बातें सही जानकारी की कमी का नतीजा हैं। जहां तथ्यों को गलत तरीके से पेश किया जा रहा है और बेवजह तोड़ा-मरोड़ा जा रहा है। राज्य में स्मार्ट बिजली मीटर लगाने से सब्सिडी यानी 125 यूनिट तक मुफ्त बिजली की सुविधा पर कोई असर नहीं पड़ेगा और न ही इससे बिजली के बिलों में कोई बढ़ोतरी होगी।
पुराने मीटरों में कभी-कभी बिल मासिक आधार पर औसत रीडिंग पर दिए जाते थे, भले ही उपभोक्ता बिजली का इस्तेमाल न कर रहे हों, लेकिन स्मार्ट मीटर में, वास्तविक खपत को वास्तविक उपयोग के आधार पर वेरिफाई किया जा सकता है। अगर उपभोक्ता बिजली का इस्तेमाल नहीं कर रहा है तो नियमित रूप से कोई औसत बिल नहीं आएगा। स्मार्ट मीटर में खपत का डेटा अपने आप एक सेंट्रल डेटा सेंटर में भेजा जाता है। यह सिस्टम सिर्फ बिजली उपभोक्ताओं को बेहतर ऑनलाइन सेवाएं, सटीक बिलिंग और बेहतर सुविधा देने के लिए शुरू किया जा रहा है।