श्रम विभाग चंबा ने पांच वर्षों का वैधानिक रिकॉर्ड न प्रस्तुत करने पर सख्त रुख अपनाया, 7 दिन में जवाब तलब
आईएलओ कन्वेंशन का हवाला देते हुए विभाग ने कार्रवाई की चेतावनी दी
संवाद नयूज एजेंसी
चंबा। गिन्नी ग्लोबल प्राइवेट लिमिटेड के प्रबंध निदेशक को श्रम विभाग चंबा ने वैधानिक रिकॉर्ड प्रस्तुत न करने के मामले में कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। विभाग ने इसे श्रम निरीक्षण में बाधा मानते हुए सख्त कार्रवाई के संकेत दिए हैं।
जानकारी के अनुसार, श्रम विभाग ने 22 अप्रैल 2026 को कंपनी को पिछले पांच वर्षों के वैधानिक रजिस्टर और रिकॉर्ड प्रस्तुत करने के निर्देश दिए थे। इस पर सुनवाई 6 मई 2026 निर्धारित की गई थी। हालांकि, कंपनी प्रबंधन ने 5 मई को पत्र भेजकर कहा कि रिकॉर्ड अत्यधिक विस्तृत और भारी-भरकम है, इसलिए विभाग को पूर्व सूचना देकर परियोजना स्थल पर ही उनका निरीक्षण किया जाए।
विभाग ने कंपनी के इस तर्क को अस्वीकार करते हुए स्पष्ट किया कि श्रम कानूनों के तहत श्रम निरीक्षक को किसी भी रिकॉर्ड को अपने कार्यालय में मंगवाकर जांचने का पूरा अधिकार प्राप्त है। साथ ही यह भी कहा गया कि श्रम निरीक्षक एक लोक सेवक हैं और नियोक्ता का दायित्व है कि वह जांच प्रक्रिया में पूरा सहयोग दे।
श्रम विभाग ने अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन के कन्वेंशन नंबर C081 (लेबर इंस्पेक्शन कन्वेंशन, 1947) का हवाला देते हुए कहा कि श्रम निरीक्षकों को बिना पूर्व सूचना किसी भी कार्यस्थल पर प्रवेश कर निरीक्षण करने का अधिकार है। वे दस्तावेजों की जांच, पूछताछ और रिकॉर्ड की प्रतियां लेने के लिए अधिकृत हैं।
विभाग ने माना कि कंपनी प्रबंधन द्वारा निरीक्षण कार्य में बाधा डालने का प्रयास किया गया है, जिसे गंभीर गंभीरता से लेते हुए कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। कंपनी को 7 दिन के भीतर लिखित जवाब देने के निर्देश दिए गए हैं और पूछा गया है कि क्यों न उनके खिलाफ सक्षम न्यायालय में कानूनी कार्रवाई शुरू की जाए। इसके अलावा, कंपनी को 11 जून 2026 को सभी आवश्यक रिकॉर्ड अनिवार्य रूप से विभाग के समक्ष प्रस्तुत करने के सख्त निर्देश दिए गए हैं।
कंपनी को इस मामले में अपना लिखित जवाब प्रस्तुत करने के लिए 7 दिनों का समय दिया गया है। नियमों की अवहेलना किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं की जाएगी और मामले में आगे की कार्रवाई निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार की जाएगी। -अनुराग शर्मा,जिला श्रम अधिकारी चंबा