चंबा। जिले में स्क्रब टायफस तेजी के साथ फैल रहा है, लेकिन मेडिकल कॉलेज चंबा में मरीजों की सुविधा के लिए पुख्ता इंतजाम नहीं हैं। स्क्रब टायफस की जांच करने के लिए मेडिकल कॉलेज में कोई व्यवस्था नहीं की गई है। मरीजों को अपना टेस्ट करवाने के लिए निजी लैबों का रुख करना पड़ रहा है। जहां पर उनसे टेस्ट के 700 से 800 रुपये लिए जा रहे हैं।
चंबा में 33 लोग अब तक स्क्रब टायफस की चपेट में आ चुके हैं। एक मरीज को छोड़ सभी लोग स्वस्थ होकर अपने घरों को जा चुके हैं। इन लोगों ने निजी लैब में अपना टेस्ट करवाया। जबकि, सरकार ने आदेश जारी किए हैं कि प्रदेश के सभी सरकारी अस्पतालों में स्क्रब टायफस की जांच की सुविधा होनी चाहिए। चंबा मेडिकल कॉलेज में यह सुविधा अभी तक मरीजों को नहीं मिल पाई है। इसको लेकर मरीजों में रोष है।
मेडिकल कॉलेज की चौथी मंजिल में स्क्रब टायफस के मरीजों का उपचार किया जा रहा है। तेज बुखार, शरीर में दर्द तथा जकड़न इस बीमारी का मुख्य लक्षण हैं। ऐसे लक्षणों वाले मरीजों को चिकित्सक स्क्रब टायफस की श्रेणी में रखकर इलाज प्रक्रिया शुरू कर देते हैं। साथ ही मरीज को स्क्रब टायफस का टेस्ट करवाने का परामर्श देते हैं। जब मरीज सरकारी लैब में टेस्ट करवाने के लिए जाते हैं तो उन्हें वहां से बैरंग लौटा दिया जाता है। मरीजों को निजी लैब में जाकर अपना टेस्ट करवाना पड़ता है। तीमारदारों अशोक कुमार, हंसराज, केवल, मनोज कुमार, टेक चंद और रवि कुमार ने जिला प्रशासन और मेडिकल कॉलेज प्रबंधन से मांग की है कि स्क्रब टायफस टेस्ट की सुविधा शुरू करवाई जाए।
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इन दिनों ग्रामीण क्षेत्रों में घास काटने का कार्य चला हुआ हैं। लोग नंगे हाथों से दराटी लेकर पहाड़ों पर घास काट रहे हैं। घास में पलने वाले पिस्सू के काटने से लोग स्क्रब टायफस की चपेट में आ रहे हैं। इसलिए विभाग लोगों को जागरूक कर रहा है कि घास काटते समय हाथों में दस्ताने पहनें।
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कार्यकारी चिकित्सा अधीक्षक डॉक्टर देेवेंद्र कुमार ने बताया कि मेडिकल कॉलेज में मरीजों का बेहतर इलाज किया जा रहा है। स्क्रब टायफस की जांच को लेकर जल्द ही उचित कदम उठाए जाएंगे।