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होली में संजय पर भारी पड़ा मातम से उठकर जाना

Sun, 07 Feb 2016 10:29 PM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, चंबा
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 मौत किस घड़ी कहां इंतजार कर रही होगी, इसका अंदाजा कोई नहीं लगा सकता है, लेकिन इस घड़ी मिलने वाले संदेश समझे जाएं तो अनहोनी टाल जरूर सकती है। होली के न्याग्रां में संजय कुमार की मौत भी कुछ ऐसा ही इशारा कर गई है। संजय कुमार अगर दोस्तों की बात मान लेता तो शायद अनहोनी टल जाती है लेकिन उसने सबकी बात को अनसुना कर दिया।
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 संजय कुमार अपने दो अन्य दोस्तों के साथ आग बुझाते हुए झुलस कर मरे लोनिवि कर्मचारी त्रिलोक चंद के घर मातम मनाने पहुंचा था। आधी रात करीब साढ़े 12 बजे तक तीनों दोस्त शव के पास बैठकर अफसोस जता रहे थे। इस बीच अचानक मौसम बुरी तरह से खराब हो गया और बर्फबारी शुरू हो गई। संजय कुमार ने ही अपने दो अन्य दोस्तों को वहां से निकलने की सलाह दी। हालांकि इस सलाह को मानने के लिए दोनों तैयार नहीं थे लेकिन संजय कुमार किसी भी कीमत में गाड़ी के साथ फंसना नहीं चाहता था और वो वहां से चला आया। इसके पीछे उसके दोनों दोस्त भी मातम से उठकर घर वापस आ गए।


लाके वाली माता और न्याग्रां के बीच मौसम बुरी तरह से खराब हो गया और तेज हवाओं से एक चीड़ का पेड़ उखड़कर संजय की गाड़ी पर आ गिरा जिससे संजय, फुंडी और विक्रम तीनों बुरी तरह से घायल हो गए। इनमें से विक्रम होश में था जबकि अन्य दोनों बेहोश हो चुके थे। विक्रम ने बर्फबारी के बावजूद अपने जख्मों की परवाह न करते हुए पैदल ही गांव की तरफ चलना शुरू कर दिया। काफी देर तक चलने के बाद वह गांव पहुंचा और उसने सारे हादसे की जानकारी गांव वालों को दी। इसके बाद गांव वालों ने गाड़ी में फंसे संजय व उसके दोस्त को बाहर निकाला, लेकिन तब तक संजय की मौत हो चुकी थी। रविवार को संजय के अंतिम संस्कार पर गम में डूबे सभी लोग यही कह रहे थे कि काश संजय ने दोस्तों की बात मान ली होती तो शायद हादसा टल जाता।
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