चंबा। जिले की सड़कें इन दिनों मानो खून की प्यासी हो गई हैं। बरसात के मौसम में हर मोड़ पर हादसों का खतरा घात लगाए बैठा है। बीते ढाई माह में 39 लोगों की जान जा चुकी है। ताजा हादसे में लाहड़ के पास एक ही परिवार के पांच सदस्यों की मौत ने एक बार फिर सड़क सुरक्षा और संवेदनशील मार्गों पर सुरक्षा इंतजामों की पोल खोल दी है।
इससे चार दिन पहले 24 जुलाई को पांगी के उदयपुर-किलाड़ मार्ग पर कडू नाला में भूस्खलन के दौरान पहाड़ी से गिरी चट्टान और मलबे की चपेट में टाटा सूमो आने से 13 लोगों की मौत हो गई थी।
वहीं, 26 जुलाई को अंतरराष्ट्रीय मिंजर मेला देखकर लौट रहे दो युवकों की बाइक बालू-साहो मार्ग पर साल खड्ड में गिर गई। हादसे में शुभम को बचा लिया गया, जबकि चालक सक्षम का अब तक कोई सुराग नहीं लग पाया है।
18 जून को छतरूंड के पास मुंडन संस्कार से लौट रही बोलेरो के करीब 500 मीटर गहरी खाई में गिरने से सात लोगों की मौत हुई थी। 31 मई को साच पास मार्ग पर पर्यटक टैक्सी दुर्घटना में आठ लोगों ने जान गंवाई थी, जबकि 11 मई को ककीरा के समीप पर्यटकों से भरी गाड़ी खाई में गिरने से गुजरात के पांच पर्यटकों समेत छह लोगों की मौत हुई थी।
लगातार हो रहे हादसों ने जिले में सड़क सुरक्षा, संवेदनशील मार्गों के रखरखाव और बरसात के दौरान सुरक्षा प्रबंधन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
उधर, पुलिस अधीक्षक विजय सकलानी ने कहा कि अधिकांश सड़क दुर्घटनाओं के पीछे मानवीय भूल और लापरवाही सामने आती है। उन्होंने लोगों से बरसात के दौरान अत्यंत आवश्यक होने पर ही यात्रा करने, वाहन सावधानी से चलाने और सीट बेल्ट का अनिवार्य रूप से उपयोग करने की अपील की।