71 किमी के होली-उतराला मार्ग में अब तक 28 किमी निर्माण, पुल के इंतजार में आगे नहीं बढ़ रहा काम
पांच दशक से सड़क की राह देख रहे ग्रामीण, भरमौर में 39 और बैजनाथ में 32 किमी प्रस्तावित मार्ग
सुभाष कुमार अग्निहोत्री
चंबा। होली-उतराला सड़क की कहानी सिर्फ अधूरे निर्माण की नहीं, बल्कि पांच दशक से जारी इंतजार की कहानी है। 71 किलोमीटर लंबा यह मार्ग आज भी पूरा नहीं हो पाया है।
भरमौर की तरफ करीब 28 किलोमीटर सड़क लाके वाली माता मंदिर के समीप तक पहुंची है, जबकि आगे का रास्ता ब्रेही नाले की कटिंग और प्रस्तावित पुल के इंतजार में है। सड़क की रफ्तार थमने से ग्रामीणों का रोष भी बढ़ता जा रहा है।
प्रस्तावित मार्ग में भरमौर क्षेत्र का 39 किलोमीटर और बैजनाथ क्षेत्र का 32 किलोमीटर हिस्सा शामिल है। ब्रेही नाले में फिलहाल रुक-रुककर हार्ड कटिंग का काम चल रहा है। लोक निर्माण विभाग के मुताबिक नाले पर पुल बनने के बाद ही आगे सड़क निर्माण का काम शुरू हो सकेगा। ऐसे में सड़क का अगला चरण फिलहाल पुल निर्माण पर टिका है।
होली-उतराला मार्ग क्षेत्र के लिए महज एक सड़क नहीं है। इसके बनने से जनजातीय क्षेत्र भरमौर के होली को बैजनाथ के रास्ते कांगड़ा जिले से वैकल्पिक संपर्क मिलने की उम्मीद है। ग्रामीणों का कहना है कि इससे आवाजाही सुगम होगी और मौजूदा लंबे रास्तों से राहत मिलेगी।
लंबे समय से काम की गति को लेकर स्थानीय लोगों में नाराजगी है। ग्रामीण बताते हैं कि निर्माण शुरू होता है, कुछ दिन काम चलता है और फिर बंद हो जाता है। अब मुख्यमंत्री के प्रस्तावित होली दौरे को लेकर लोगों ने सड़क का मुद्दा प्रमुखता से उठाने की तैयारी की है। पांच दशक पुराने इस इंतजार के बीच ग्रामीण अब निर्माण में लगातार गति की उम्मीद लगाए बैठे हैं। उधर, लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता भाल चंद ने बताया कि ब्रेही नाले में हार्ड कटिंग चल रही है। नाले पर पुल बनाने के बाद ही आगे का कार्य आरंभ होगा। विभाग पूरी मुश्तैदी से अपने कार्य में जुटा है।
- पांच दशक से सड़क का न बन पाना होली क्षेत्र के लोगों की विकास की राह में रोड़ा ही बना हुआ है। - सुनील कुमार, सचिव, होली-उतराला संघर्ष समिति
होली-उतराला सड़क बनने से क्षेत्र के लोगों का कांगड़ा जिला में पहुंचना सुगम हो जाएगा। जो ग्रामीणों के लिए बेहतरीन विकल्प रहेगा। - प्रकाश शर्मा, ग्रामीण
होली से उतराला के लिए सड़क निर्माण कार्य आरंभ तो हुआ है, लेकिन कुछ दिन कार्य चलने के बाद बीच में यह बंद पड़ जाता है। - लेखराज, ग्रामीण
सड़क की आस लिए कई बुजुर्ग स्वर्ग सिधार गए हैं। ऐसे में बार-बार कार्य बंद होना लोगों की आस को धूमिल कर रहा है। - कमलेश कुमार, ग्रामीण