संवाद न्यूज एजेंसी
साहो (चंबा)। जिले के विभिन्न ग्रामीण क्षेत्रों में कीड़ा लगने से सेब के पेड़ सूखने लगे हैं। इससे बागवानों की चिंता बढ़ने लगी है। सेब के पेड़ों को रिंग बोरर नामक कीड़ा नुकसान पहुंचा रहा है। एक तरफ जहां भारी बारिश और ऊपरी क्षेत्रों में हुई बर्फबारी के बाद बागवान अच्छी पैदावार की उम्मीद लिए बैठे हैं। वहीं अब रिंग बोरर कीड़े की समस्या का समाधान करना बागवानों केे लिए चुनौती बनता जा रहा है। बागवानों ने उद्यान विभाग से समय रहते बागवानों की समस्या का हल करने की मांग की है। बागवान जिले के पहाड़ी क्षेत्रों में सेब की उच्च घनत्व की खेती करने में रुचि दिखा रहे हैं। बेरोजगार युवा बागवानी में नई-नई तकनीकें अपनाकर अपनी आर्थिकी को सुदृढ़ करने के लिए प्रयासरत हैं।
ऐसे में उच्च घनत्व खेती के तहत पहाड़ी क्षेत्रों में बागवानों ने बगीचे लगाए। अब सेब के पेड़ों और पौधों पर रिंग बोरर कीड़ा हमला कर रहा है। हर वर्ष सेब के बगीचों में रिंग बोरर कीड़ा बागवानों की मेहनत पर पानी फेर रहा है। बागवानों नारायण सिंह, दिलीप कुमार, राकेश कुमार और संजीव कुमार ने उद्यान विभाग के अधिकारियों से कीड़े से बागवानों को निजात दिलवाने की मांग की है।
ये हैं लक्षण
सेब के पेड़ों के पत्ते पीले पड़ना शुरू हो जाते हैं। उसके बाद ये पत्ते सूखकर झड़ जाते हैं। उसके बाद पेड़ की टहनियां भी सूखने लग जाती हैं जिससे सेब का पेड़ खत्म हो जाता है। लिहाजा समयनुसार दवाई का छिड़काव करने से इस पर नियंत्रण पाया जा सकता है।
केवीके चंबा के मुख्य समन्वयक डॉ. राजीव रैणा ने बताया कि सेब के पेड़ों-पौधों में लक्षण दिखने पर तुरंत विभागीय विशेषज्ञों को अवगत करवाएं। रिंग बोरर कीड़ा लगने पर लिथल चार एमएम एक लीटर पानी में घोलकर सेब के पेड़ों-पौधों पर निरंतर छिड़काव करें। स्प्रे समय पर होने से इस बीमारी पर रोक लगाई जा सकती है। बताया कि रिंग बोरर और रूट बोरर कीड़े अलग-अलग होते हैं। लिहाजा सेब के पेड़ों को लगी बीमारी के हिसाब से उनका उपचार संभव है।