निजी अस्पताल में मरीजों के शरीर पर बुरा असर डालने वाले एनएस का भरा सैंपल
जब तक नहीं आ जाती जांच रिपोर्ट तब तक मरीजों पर इस्तेमाल पर लगाई रोक
प्रवीण कुमार
चंबा। निजी अस्पताल में मरीजों के शरीर पर बुरा असर डालने वाले एनएस का स्वास्थ्य विभाग ने सैंपल भरा है। गुणवत्ता जांच के लिए सैंपल को कंडाघाट की प्रयोगशाला में भेजा गया है।
वैज्ञानिक तरीके से एनएस की बारीकी से जांच होगी। इसमें पता लगाया जाएगा कि आखिरकार यह एनएस मरीजों के शरीर पर बुरा असर क्यों डाल रहा था। इतना ही नहीं, निजी अस्पताल प्रबंधन को निर्देश दिए गए हैं कि जब तक लैब की रिपोर्ट नहीं आ जाती, तब तक एनएस का इस्तेमाल मरीजों पर न करें। किसी अन्य कंपनी के एनएस के इस्तेमाल का परामर्श दिया गया है।
जिला मुख्यालय के साथ लगते निजी अस्पताल में मरीजों के इलाज में जब डॉक्टर 500 एमएल वाले एनएस का इस्तेमाल कर रहे थे तो उसका मरीज के शरीर पर बुरा असर दिखाई दे रहा था। शरीर पर लाल दाने और खारिश की समस्या उत्पन्न हो रही थी। एक मरीज पर दिखे इसके असर को चिकित्सकों ने गंभीरता से नहीं लिया लेकिन जब बाकी मरीजों पर भी इसका बुरा प्रभाव दिखाई देने लगा तो उन्होंने तुरंत दवा निरीक्षक को इसकी सूचना दी। उन्होंने अस्पताल में जाकर एनएस के सैंपल भरे। जब उन्होंने मरीजों से बात की तो उन्होंने भी यही बताया कि एनएस चढ़ाने पर उनके शरीर पर बुरा प्रभाव हो रहा था।
राज्य दवा नियंत्रक मनीष कपूर ने बताया कि मरीजों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखकर एनएस के सैंपल भरे गए हैं। कंडाघाट से सैंपल की जांच रिपोर्ट आने पर आगामी कार्रवाई की जाएगी।
इसलिए किया जाता है इस्तेमाल
मरीज पर एनएस का इस्तेमाल शरीर में पानी और नमक की कमी (डिहाइड्रेशन) को पूरा करने और इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन को ठीक करने के लिए किया जाता है। दस्त, उल्टी, अत्यधिक पसीना आने या कमजोरी के कारण शरीर में हुई पानी की भारी कमी को भी इससे दूर किया जाता है।