चंबा। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के 7वें वेतनमान आयोग की सिफारिशों को लागू करवाने के लिए चंबा कॉलेज में गवर्नमेंट कॉलेज टीचर एसोसिएशन इकाई के पदाधिकारियों ने गेट मीटिंग की। इसमें सभी पदाधिकारियों ने एक स्वर में प्रदेश सरकार से अभिलंब 7वें वेतन आयोग की सिफारिशों को लागू करने की मांग उठाई।
एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष परविंदर कुमार ने कहा कि पंजाब में चुनाव के कारण आदर्श आचार संहिता लागू होने से विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालय के प्राध्यापकों को यूजीसी के सातवें पे कमीशन को लागू नहीं किया गया है। प्रदेश सरकार सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों को अविलंब लागू करे।
एसोसिएशन के इकाई महासचिव डॉ. मोहिंद्र सलारिया ने कहा कि विश्वविद्यालयों और कॉलजों के प्राध्यापकों की नियुक्ति और पदोन्नति विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के मापदंडों पर की जाती है। पूरे देशभर के विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के नियम लागू होते हैं। वर्ष 2014 के बाद कॉलेजों के प्राध्यापकों की एमफिल और पीएचडी की इंक्रीमेंट बंद कर दी गई है।
एक ही विभाग में कुछ प्रोफेसरों को एमफिल और पीएचडी की इंक्रीमेंट दी जाती है, जो तर्कसंगत नहीं है। एसोसिएशन ने एमफिल और पीएचडी की इंक्रीमेंट को बहाल करने की सरकार से मांग की है। एमफिल और पीएचडी की इंक्रीमेंट बंद करने से देश के अनुसंधान और शोध कार्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। एसोसिएशन ने यूजीसी के मापदंडों और लोक सेवा आयोग से चयनित होने वाले असिस्टेंट प्रोफेसर के अनुबंध काल को सेवाकाल में जोड़ने की भी प्रदेश सरकार से मांग की है। गेट मीटिंग के उपरांत प्राध्यापक वर्ग ने महाविद्यालय के प्राचार्य के माध्यम से ज्ञापन भेजकर सरकार से सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों को अभिलंब लागू करने की मांग की है।
इस अवसर पर वरिष्ठ प्रोफेसर राकेश राठोर, डॉ. विजय नाग, डॉ. ज्योतिंदरा ठाकुर, डॉक्टर महिंद्र सलारिया, डॉ. विजय नाग, डॉ. हेमंत, डॉक्टर मनीष, डॉक्टर पूनम, प्रोफेसर सुमित, प्रोफेसर पूर्णिमा, डॉ. जयश्री, डॉक्टर चमन, डॉ. सुरेंद्र, प्रोफेसर उपेंद्र गुप्ता, प्रो. परिणीता, प्रो. केहर सिंह, प्रो. अविनाश, डॉक्टर संतोष, प्रो. विजय कुमार आदि ने भाग लिया।