चंबा। संस्थागत प्रसव करवाने में पहले ही जिला चंबा दो साल से फिसड्डी रहा है, अब गर्भवती महिलाओं के गर्भ में पल रहे बच्चे को विभिन्न बीमारियों से बचाने में भी असफल हो रहा है।
गर्भवती महिलाओं को तीन महीने से चंबा मेडिकल कॉलेज में कैल्शियम की गोलियां नहीं दी जा रही हैं। प्रसव से पहले और बाद में दो महीने तक महिला को यह गोली खाने की सलाह दी जाती है। चंबा में तीन महीनों से कैल्शियम की गोलियां खत्म हो चुकी हैंं। मेडिकल कॉलेज में हर माह 200 से 300 महिलाओं के प्रसव करवाए जाते हैं, जबकि सैकड़ों गर्भवती महिलाओं को हर माह मेडिकल कॉलेज में अपने स्वास्थ्य जांच के लिए पहुंचती हैं। इन सभी महिलाओं को विशेषज्ञ कैल्शियम की गोलियां नियमित रूप से खाने की सलाह देते हैं। यह गोलियां महिलाओं को निशुल्क उपलब्ध करवाने का प्रावधान है, लेकिन मेडिकल कॉलेज चंबा में महिलाओं को ये गोलियां नहीं मिल पा रही हैं। इसके चलते उन्हें कैल्शियम की गोली खाने के लिए निजी केमिस्ट से खरीदनी पड़ रही हैं।
हैरानी इस बात की है कि जिस मेडिकल कॉलेज को शुरू करने को लेकर भाजपा और कांग्रेस के नेता अपनी-अपनी पार्टी के उपलब्धियां गिनाते हैं। उनमें कोई भी नेता इन महिलाओं को नहीं मिलने वाली दवाई को लेकर आवाज नहीं उठा पाए हैं। जिला चंबा में सात नागरिक अस्पताल चल रहे हैं, लेकिन वहां कोई भी महिला रोग विशेषज्ञ तैनात नहीं है। ऐसे में इन सभी क्षेत्रों की गर्भवती महिलाएं विशेषज्ञ से अपनी जांच करवाने के लिए मेडिकल कॉलेज पहुंचती हैं। यहां जांच के बाद विशेषज्ञ उन्हें कैल्शियम की गोली खाने का परामर्श भी देते हैं। ये गोलियां महिलाओं को दवा डिस्पेंसरी में मुफ्त उपलब्ध हो जाती थीं, लेकिन तीन महीनों से उन्हें वहां पर अब ये गोलियां नहीं दी जा रही हैं।
चिकित्सा अधीक्षक डॉक्टर बिपन ठाकुर ने बताया कि कैल्शियम की टैबलेट को लेकर कंपनी में ऑर्डर दिया जा चुका है। आचार संहिता हटने के उपरांत लोकल स्तर पर टैबलेट खरीदकर महिलाओं को उपलब्ध करवाई जाएंगी।