ग्रेस पीरियड खत्म होने के अगले दिन हुई मौत, बीमा कंपनी की कार्रवाई को सही ठहराया
जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग की अदालत से सुनाया फैसला
संवाद न्यूज एजेंसी
चंबा। बीमा पॉलिसी का प्रीमियम समय पर जमा नहीं करने के कारण पॉलिसी लैप्स हो गई। बीमाधारक की मृत्यु के बाद नामित पत्नी की ओर से किए गए पांच लाख रुपये के मृत्यु दावे को खारिज करना उचित पाया गया।
जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग हेमांशु मिश्रा की अदालत ने शिकायत को मेरिट रहित मानते हुए बिना किसी लागत के खारिज कर दिया।
मामला भूपिंदर सिंह की जीवन लक्ष्य पॉलिसी संख्या 148993377 से जुड़ा है। पॉलिसी 22 अक्तूबर 2021 को शुरू हुई थी। इसकी अवधि 22 अक्तूबर 2024 तक थी। भूपिंदर सिंह की 8 जुलाई 2022 को उनके निवास पर बीमारी के कारण मौत हो गई। इसके बाद पत्नी ने नामित-कानूनी उत्तराधिकारी के रूप में मृत्यु लाभ के लिए दावा किया। इसे निगम ने पॉलिसी लैप्स होने के आधार पर अस्वीकार कर दिया। रिकॉर्ड के अनुसार अंतिम सफल प्रीमियम भुगतान 11 जून 2022 को हुआ था। इससे 22 मई का बकाया प्रीमियम चुकाया गया। इसके बाद 22 जून को देय मासिक किस्त जमा नहीं हुई। पॉलिसी के तहत 15 दिन की ग्रेस अवधि 7 जुलाई 2022 को समाप्त हो गई। बीमाधारक की मृत्यु अगले दिन 8 जुलाई को हुई। आयोग ने पॉलिसी की फॉरफीचर रेगुलेशन की क्लॉज-2 का हवाला देते हुए कहा कि दो पूर्ण वर्ष से कम प्रीमियम जमा होने और अगली किस्त ग्रेस पीरियड में न चुकाने पर पॉलिसी के लाभ समाप्त हो जाते हैं। बीमा शर्तें दोनों पक्षों पर बाध्यकारी हैं। इसलिए निगम की ओर से दावा खारिज करने में सेवा की कोई कमी नहीं थी। शिकायतकर्ता की पांच लाख रुपये बीमा राशि, नौ प्रतिशत ब्याज और मानसिक परेशानी के मुआवजे की मांग भी स्वीकार नहीं की गई।