ट्रायल न्यायालय के समक्ष आत्मसमर्पण करने के न्यायालय ने दिए आदेश
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश रमणिक शर्मा की अदालत ने सुनाया अहम फैसला
संवाद न्यूज एजेंसी
चंबा। दोष सिद्धि और सजा के आदेश के खिलाफ अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश रमणिक शर्मा की अदालत में लगाई गई याचिका को न्यायालय ने रद्द कर दिया है।
साथ ही न्यायालय ने व्यक्ति को ट्रायल न्यायालय के समक्ष आत्मसमर्पण करने के आदेश दिए हैं। ऐसा न करने की सूरत में व्यक्ति के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
जानकारी के अनुसार व्यक्ति ने जान-पहचान के दम पर दूसरे व्यक्ति से घरेलू खर्चों को पूरा करने के लिए एक लाख रुपये उधार लिए। शिकायतकर्ता ने आरोपी को 1,00,000 रुपये उधार दे दिए। आरोपी ने कुछ ही दिनों में राशि लौटाने का वादा किया। अपनी देनदारी चुकाने के लिए आरोपी ने 826099 संख्या का 1,00,000 रुपये का चेक जारी किया। समय पर भुगतान न होने पर आरोपी की ओर से दिया गया चेक व्यक्ति ने बैंक में लगाया लेकिन खाते में राशि न होने पर चेक बाउंस हो गया। इसकी सूचना मिलने पर व्यक्ति की चिंता बढ़ गई। उन्होंने आरोपी से संपर्क साधने की कोशिश की लेकिन वह टाल-मटोल करने लगा। आखिरकार व्यक्ति ने न्यायालय में आरोपी के खिलाफ याचिका लगाई। न्यायालय ने समस्त सबूतों और गवाहों को ध्यान में रखते हुए आरोपी को चेक बाउंस मामले में दोषी ठहराते हुए दो साल का साधारण कारावास और एक लाख 80 हजार रुपये मुआवजा देने के आदेश जारी किए। निचली अदालत के फैसले को आरोपी ने अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश रमणिक शर्मा की अदालत में चुनौती देते हुए याचिका लगाई। न्यायालय ने समस्त सबूत और गवाह को ध्यान में रखते हुए निचली अदालत के फैसले को सुरक्षित रखते हुए उसे ट्रायल कोर्ट के समक्ष आत्मसमर्पण करने के आदेश जारी किए हैं।