पर्यटन स्थल खजियार में शुक्रवार को उस समय विवाद खड़ा हो गया जब नौतोड़ जमीन की पैमाइश करने पहुंचे सेना के अधिकारी के विरोध में स्थानीय ग्रामीण सड़क पर उतर आए। इन ग्रामीणों ने राजस्व विभाग के खिलाफ नारेबाजी की और उनके जमीन को जबरन नौतोड़ में शामिल करने के आरोप लगाए। ग्रामीणों ने राजस्व विभाग को जमीन की पैमाइश नहीं करने दी।
स्थानीय ग्रामीणों ने बताया कि जिस जमीन की पैमाइश की जा रही है वो बुजुर्गों के जमाने से उनकी है और इस जमीन के कई हिस्सेदार हैं, जो जमीन पर खेतीबाड़ी कर अपना गुजारा चला रहे हैं। अब राजस्व विभाग इस जमीन को नौतोड़ बनाकर सेना के अधिकारी को देना चाहता है जिसे वे किसी भी कीमत पर पूरा नहीं होने देंगे। ग्रामीणों ने कहा कि जमीन को यदि जबरन नौतोड़ साबित किया गया तो सभी ग्रामीण सामूहिक रूप से अनशन पर बैठ जाएंगे।
इस मौके पर सन्नी कुमार, काका राम, सुरेश, नरेश, दूनी चंद, राकेश कुमार, ईश्वर चंद, प्रेम लाल, सोभिया राम, महिंद्र कुमार, अनिल कुमार, चमारू राम, अरुण कुमार, विरेंद्र, तिलक राज, शकुंतला, अश्वनी कुमार, पुष्पा, पवन, निशा देवी, यज्ञ दत्त, सुरमी, आशा, कांता, विमला, रीमा, निशा, हेम राज, मेहर दत्त व रजनी देवी ने बताया कि उनके पूर्वजों का खजियार में मालिकाना हक रहा है, लेकिन अब सरकारी जमीन बताकर इसे नौतोड़ के रूप में आवंटित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि ग्रामीण किसी भी कीमत पर अपनी जमीन नहीं छोड़ेंगे। चाहे इसके लिए उन्हें कोई भी कीमत क्यों न चुकानी पड़े।
इनसेट...
1971 में जारी हुई थी जमीन : कानूनगो
उधर, संबंधित कानूनगो देवेंद्र कुमार का कहना है कि शुक्रवार को वह खजियार में नौतोड़ की जमीन की पैमाइश करने गए थे, लेकिन ग्रामीणों ने विरोध शुरू कर दिया। जिस जमीन को नौतोड़ में दिया गया है वह 1971 में सरकारी जमीन थी जिस पर बाद में कब्जे हुए हैं। उन्होंने बताया कि राजस्व विभाग निर्देश का पालन कर रहा है।
इनसेट...
नौतोड़ में नहीं जाने देंगे जमीन : पंचायत प्रधान
वहीं, खजियार पंचायत प्रधान महेंद्र सिंह का कहना है कि जिस जमीन को नौतोड़ बताया जा रहा है वो लोगों की पुश्तैनी जमीन है। किसी भी कीमत पर ग्रामीण इस जमीन को नौतोड़ में नहीं जाने देंगे। उन्होंने बताया कि यदि दबाव डाला गया तो ग्रामीण आंदोलन शुरू कर देंगे।