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बसों के इंतजार में भटकते रहे बे‘बस’ मुसाफिर

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चंबा। जिले के 132 रूटों पर सोमवार को निजी बसों के पहिये थमे रहे। इसके चलते लोग जगह-जगह घंटों बसों का इंतजार करते दिखे। निजी बसों के पहिये थमने से एचआरटीसी बसों में कोविड नियमों की खूब धज्जियां उड़ती दिखी।
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गौरतलब है कि कोविड काल में निजी बस सेवा बंद रहने के बावजूद आठ माह से निजी बस ऑपरेटरों को विशेष पथ कर, पथ कर और एसआरटी की सुविधा नहीं मिल पाई है। निजी बस ऑपरेटरों की मानें तो वे कई बार सरकार से अपनी मांगों को लेकर मिल चुके हैं। बावजूद इसके इस दिशा में अभी तक उन्हें महज आश्वासन ही मिले हैं।
इन आश्वासनों से तंग आकर अब निजी बस ऑपरेटर यूनियन ने प्रदेश यूनियन के आह्वान पर सोमवार से निजी बस सेवा को बंद कर दिया। जिले के अधिकांश रूटों पर चलने वाली निजी बसों के पहिये थमने से यात्रियों को पैदल आवाजाही करनी पड़ी। इतना ही नहीं, कई जगह घंटों बसों का इंतजार करने के बाद थकहार कर लोगों को निजी वाहन में भारी-भरकम किराया चुकाकर अपने घरों तक पहुंचना पड़ा। हालांकि, निजी बस ऑपरेटर यूनियन ने पहले ही सरकार और प्रशासन को हड़ताल पर जाने के लिए पहले ही सूचित कर दिया था। बावजूद इसके सरकार और प्रशासन की ओर से लोगों की सुविधा को देखते हुए एचआरटीसी बसों की संख्या को नहीं बढ़ाया गया। इसका खामियाजा सोमवार को लोगों को भुगतना पड़ा।
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निजी बस ऑपरेटर यूनियन के प्रधान रवि महाजन ने कहा कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं हो जाती हैं तब तक निजी बस ऑपरेटर यूनियन हड़ताल पर ही रहेगी। कहा कि सरकार निजी बस ऑपरेटर यूनियन की मांगें पूरी न कर उन पर अतिरिक्त बोझ डालने का काम कर रही है।
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