सरकारी अस्पतालों में मरीज बीमारी के साथ लाचारी से भी जूझ रहे हैं। महंगाई के इस दौर में परिवार की मासिक आय सिर्फ 600 रुपये होगी तो ही अस्पताल में खाना नसीब होगा।
यह प्रबंध सभी सरकारी अस्पतालों में लागू हैं और कई सालों से इनमें कोई बदलाव नहीं हुआ है। अस्पताल में दाखिल होने वाले मरीज से बाकी छानबीन के साथ ही उसकी आय के बारे में भी पूछा जाता है और 600 रुपये मासिक आय दर्ज होने के बाद ही मरीज की फाइल में खाना का कॉलम भरा जाता है। यदि मरीज गलती से आय ज्यादा बता दे तो उसे अस्पताल में मिलने वाली इस सुविधा से वंचित होना पड़ता है।
हालांकि यहां सबसे बड़ी राहत की बात यह है कि कई अस्पतालों में प्रबंधक मरीज से आय के प्रमाण नहीं मांगते हैं। चंबा में जिला के सबसे बड़े क्षेत्रीय अस्पताल की बात करें तो 200 बिस्तरों वाले इस अस्पताल में दाखिल मरीजों की संख्या 250 तक रहती है और यहां सिर्फ 125 मरीजों को ही खाना परोसा जा रहा है। जिन मरीजों को खाना नहीं मिल रहा है उनमें से कुछ ने खुद ही अस्पताल का खाना खाने से इंकार कर दिया है जबकि कुछ लोग ऐसे हैं जिन्होंने गलती से आय 600 रुपये से अधिक लिखवा दी और अब अस्पताल में महंगे उपचार के साथ ही बाजार से महंगा खाना भी खाने को मजबूर हैं।
उधर, अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. विशाल महाजन का कहना है कि अस्पताल में दाखिल होने वाले मरीज से उसकी आय पूछी जाती है। यह नियम है और जिस मरीज की आय 600 रुपये तक होती है उसे ही खाना दिया जाता है। अस्पताल प्रबंधन आय का प्रमाण नहीं मांगता है और मौखिक तौर पर बताई गई आय को सच मान लिया जाता है।