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Chamba News: मुफ्त होने वाले टेस्ट का निजी लैबों में मरीज चुका रहे 2000 रुपये शुल्क

Mon, 22 Jun 2026 10:56 PM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
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कैंसर रोग का पता लगाने वाला बायोप्सी टेस्ट एक महीने से पड़ा है बंद
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खराब मशीन को ठीक करवाने में लापरवाही दिखा रहा अस्पताल प्रबंधन
हर माह लाखों रुपये पर्ची शुल्क से हो रहे जमा, मरीजों को फिर भी नहीं राहत

प्रवीण कुमार
चंबा। पंडित जवाहर लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज चंबा में कैंसर रोग की जांच बंद हो चुकी है। कैंसर का पता लगाने के लिए सबसे जरूरी बायोप्सी टेस्ट एक महीने से नहीं किया जा रहा है।
शरीर के किसी असामान्य हिस्से, गांठ या ट्यूमर से ऊतक यानी टीशू या कोशिकाओं का एक छोटा सा नमूना निकालकर माइक्रोस्कोप से जांचा जाता है। इसका मुख्य उपयोग कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों की पुष्टि करना, उनकी स्टेज जानना या अन्य संक्रमणों का सटीक कारण पता लगाना है। ऑपरेशन से पूर्व हर मरीज का यह टेस्ट अवश्य होता है। इसके अलावा गर्भवती महिलाओं के लिए भी यह टेस्ट अनिवार्य होता है लेकिन मरीजों को अब टेस्ट करवाने के लिए निजी लैबों में जाना पड़ रहा है।
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मेडिकल कॉलेज की सरकारी लैब में यह टेस्ट मुफ्त किया जाता है। निजी लैबों में टेस्ट का 2000 रुपये शुल्क लिया जा रहा है। रिपोर्ट दो दिन बाद दी जा रही है। जांच के लिए निजी लैब सैंपल को बाहर भेज रही हैं। जिले में कैंसर के करीब 5000 रोगी हैं। समय पर रोग की पहचान के लिए जरूरी टेस्ट बंद होना काफी चिंता का विषय है। रोजाना सरकारी लैब में 80 से 100 मरीजों के टेस्ट किए जाते थे लेकिन एक महीने से यह सुविधा बंद पड़ी है।
उधर, मेडिकल कॉलेज प्रवक्ता डॉक्टर मानिक सहगल ने बताया कि खराब मशीन को ठीक करवाने के लिए एक्सपर्ट बुलाए गए हैं। जलद ही मरीजों के टेस्ट सरकारी लैब में शुरू किए जाएंगे।

कैंसर रोग का समय पर पता लग जाए तो इसका इलाज संभव है। ऐसे में मेडिकल कॉलेज में यह टेस्ट शुरू होना काफी जरूरी है। - विनय सिंह


निजी लैब में 2000 रुपये खर्च कर हर किसी मरीज के लिए संभव नहीं है। प्रशासन और मेडिकल कॉलेज प्रबंधन को टेस्ट शुरू करवाने की व्यवस्था करनी चाहिए। - सोनू ठाकुर
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एक महीने से मशीन खराब है। इसे ठीक नहीं करवाना प्रबंधन की लापरवाही को दर्शाता है। अब तो बजट न होने का हवाला भी नहीं दिया जा सकता। पर्ची शुल्क से हर माह लाखों जुटाए जा रहे हैं। - दिनेश कुमार

मेडिकल कॉलेज में मरीजों से पर्ची के नाम पर 10 रुपये तो वसूले जा रहे हैं, लेकिन यह धनराशि मरीजों के वेलफेयर पर खर्च नहीं की जा रही। - मनु ठाकुर

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