चंबा। जिले के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में जहां 400 से अधिक दवाइयां मरीजों को मुफ्त मिलनी चाहिए वहीं मरीजों को बड़ी मुश्किल से दो या तीन दवाइयां ही उपलब्ध हो पा रही हैं। इसकी वजह से मरीज को चिकित्सक से जांच करवाने के उपरांत निजी केमिस्ट की दुकान से दवाई खरीदनी पड़ रही है। यही हाल जिले के सिविल अस्पतालों, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और स्वास्थ्य उपकेंद्रों का है। यहां पर सरकार ने मरीजों की सुविधा के लिए जितनी दवाइयों को उपलब्ध करवाने का प्रावधान किया है उतनी मरीजों को नहीं मिल पा रही हैं। इससे मरीज काफी परेशान हैं। वीरवार को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र साहो में मरीज चेकअप करवाने के लिए पहुंचे थे। मरीजों की पर्ची पर जो दवाइयां लिखी जा रही थीं उसमें से बीस प्रतिशत दवाइयां ही उन्हें सीएचसी में मिल रही थीं। जबकि 80 प्रतिशत दवाइयां निजी केमिस्ट की दुकान में जाकर खरीदनी पड़ रही थीं।
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में स्वास्थ्य जांच करवाने के लिए आए था। जब चिकित्सक ने उनकी जांच की तो पर्ची पर पांच से छह दवाइयां लिखीं जिनमें दो दवाइयों ही उन्हें सीएचसी में मिलीं। अन्य दवाइयां बाहर से खरीदनी पड़ीं। -लता मरीज।
सीएचसी में मरीजों को सभी दवाइयां नहीं मिल पा रही हैं। जेनरिक दवाइयां जो सरकार की तरफ से भेजी जा रही हैं उनका इस्तेमाल मरीजों के इलाज में कम होता है। क्योंकि चिकित्सक मरीजों को दूसरी दवाई लिखते हैं। -निजू मरीज।
बीमारी देखकर चिकित्सक को उसे जल्दी स्वस्थ करने के लिए जो दवाई लिखनी पड़ती है वह दवाई सीएचसी में उपलब्ध ही नहीं होती। इसके कारण मरीज को बाहर से ही दवाई खरीदनी पड़ती है। -संजू मरीज।
सरकार मरीजों को सैकड़ों की संख्या में सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में दवाइयां मुफ्त उपलब्ध करवाने की बातें कर रही है। जबकि प्रदेश के आकांक्षी जिले में मरीजों को स्वास्थ्य संस्थानों में सभी दवाइयां नहीं मिल पा रही हैं। -कुकू मरीज।
जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉक्टर जालम सिंह ने बताया कि वह इस मामले में कुछ भी जानकारी नहीं दे सकते। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉक्टर कपिल शर्मा ने बताया कि 150-200 के करीब दवाइयां सीएचसी में उपलब्ध हैं। कुछ दवाइयां विभाग नहीं खरीद सकता। उनको मरीजों को बाहर से ही खरीदना पड़ता है। मरीजों की सुविधा के लिए विभाग हरसंभव प्रयास कर रहा है।