लंगर समितियाें ने पंजीकरण शुल्क और सिक्योरिटी राशि के निर्णय पर उठाए सवाल
बोले- मणिमहेश यात्रा में लंगर व्यावसायिक गतिविधि नहीं, सामाजिक सेवा परंपरा
कहा- पिछले वर्ष आपदा में निभाई निस्वार्थ सेवा, मंत्री जगत नेगी ने की थी सराहना
संवाद न्यूज एजेंसी
मैहला (चंबा)। मणिमहेश यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं के लिए लगाए जाने वाले लंगरों को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है।
उपायुक्त की ओर से लंगर सेवा समितियों के लिए 12 हजार रुपये पंजीकरण शुल्क और 25 हजार रुपये सिक्योरिटी राशि निर्धारित करने की बात सामने आने के बाद कई लंगर समितियों ने इस निर्णय पर सवाल उठाया और प्रशासन से इस पर पुनर्विचार की मांग की है।
लंगर सेवा समितियों ने कहा कि मणिमहेश यात्रा में लंगर लगाना व्यावसायिक गतिविधि नहीं, बल्कि वर्षों पुरानी धार्मिक और सामाजिक सेवा परंपरा है। देश के विभिन्न हिस्सों से आने वाली समितियां श्रद्धा, सहयोग और संसाधनों से हजारों श्रद्धालुओं के लिए भोजन, पानी और अन्य आवश्यक सुविधाओं की व्यवस्था करती हैं। पिछले वर्ष यात्रा के दौरान आई त्रासदी के समय लंगर सेवकों ने मानवता की मिसाल पेश की थी। जब हालात बेहद कठिन थे, उस समय स्वयंसेवकों ने दिन-रात यात्रियों की सहायता की। भोजन और पानी उपलब्ध करवाया। प्रशासन के साथ मिलकर राहत कार्यों में सहयोग दिया।
मणिमहेश लंगर सेवा समिति मोगा, मुकेरियां, दीनानगर और अंबाला के सदस्यों ने कहा कि उस समय मंत्री जगत सिंह नेगी ने लंगर सेवा समितियों के समर्पण और निस्वार्थ भावना को देखते हुए कहा था कि आने वाले समय में लंगर समितियों से किसी प्रकार का पंजीकरण शुल्क और सिक्योरिटी राशि नहीं ली जाएगी। लंगर स्थलों पर पानी, बिजली और शौचालय जैसी सुविधाएं प्रशासन की ओर से उपलब्ध करवाने और सफाई व्यवस्था के लिए कर्मचारियों की तैनाती करने का आश्वासन भी दिया था। वर्तमान में शुल्क और सिक्योरिटी राशि लागू करने से सेवा भावना से अतिरिक्त आर्थिक दबाव पड़ेगा।