पांगी (चंबा)। जनजातीय क्षेत्र पांगी में विद्युत उपभोक्ताओं को बीते आठ दिन में महज तीन घंटे ही बिजली आपूर्ति मिल पाई है। ठंड के चलते यहां पानी के स्रोत जमना शुरू हो गए हैं, जिससे बिजली उत्पादन प्रभावित हुआ है। इस कारण पांगीवासियों की रातें अंधेरे में ही काटनी पड़ रही है। क्षेत्र की 25 हजार आबादी को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। विद्युत उपभोक्ताओं का कहना है कि विद्युत आपूर्ति ठप होने का खामियाजा स्कूली बच्चों, नौकरीपेशा, लोक मित्र केंद्रों और आटा चक्की संचालकों को उठाना पड़ रहा है।
ग्रामीण बृजलाल, शेर सिंह, इंद्रा कुमारी, देसराज, शन्नू कुमारी, सरोजनी, भीमसेन, कांता कुमारी, कमला देवी, केदारनाथ, सतीश शर्मा, कौश्लया देवी, पदमदेव, कुशला देवी और चंद्र कुमार ने बताया कि क्षेत्र में साच पावर हाउस से आठ दिन तक पांगी घाटी में बिजली आपूर्ति नहीं हुई। सोमवार सुबह 11 बजे से लेकर दोपहर दो बजे तक विद्युत सप्लाई हुई। इसके बाद से बिजली आपूर्ति नहीं हो पाई है। इससे ग्रामीणों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। ग्राम पंचायत किलाड़, करैल, करयास, हुड़ान, करयूनी, फिंडरू, साच, मिंधल, साहली, पुर्थी, सेचू, शुण और कुमार समेत अन्य पंचायतों के तहत आते गांवों में बिजली गुल होने से विशेषकर स्कूली बच्चों, मरीजों और गृहणियों की दिक्कतें बढ़ गई हैं।
शीतलहर से और बढ़ रही दिक्कत
मौसम में बदलाव के चलते क्षेत्र में शीतलहर का प्रकोप काफी बढ़ गया है। ऐसे में विद्युत बोर्ड प्रबंधन की ओर से पूरा दिन भर बिजली आपूर्ति बहाल न करने के चलते लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीण चाह कर भी अपने इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का इस्तेमाल तक नहीं कर पा रहे हैं।
जम रहा पानी, कम बन पा रही बिजली
पांगी में साच पावर हाउस को संचालित कर दिया गया है। कड़ाके की ठंड के चलते पानी के स्रोत जमना आरंभ हो गए हैं। जिस वजह से खड्डों और नालों में जलस्तर की कमी हुई हैं। नतीजतन, विद्युत उपभोक्ताओं को चार मेगावाट डिमांड के अनुरूप अभी तक महज आधा मेगावाट बिजली ही तैयार हो पा रही हैं। जिसे कुछ-कुछ समय के लिए सभी उपभोक्ताओं को प्रदान करने का कार्य किया जा रहा है।
राजीव ठाकुर, अधीक्षण अभियंता, विद्युत बोर्ड