चंबा। पंडित जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज चंबा में मरीजों को समय पर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराना अभी भी चुनौती बना हुआ है। तीन में से केवल एक एंबुलेंस ही सड़क पर दौड़ रही है, जबकि एक खराब है और दूसरी पासिंग में अटक गई है। नतीजन, गंभीर रूप से बीमार मरीजों को शिमला, टांडा और चंडीगढ़ रेफर करने के लिए तीमारदारों को आठ से 17 हजार रुपये तक खर्च करने पड़ रहे हैं।
जानकारी के अनुसार जिले में पंडित जवाहरलाल नेहरू सरकारी मेडिकल कॉलेज की स्थापना 2016-2017 में हुई। जिसे साल 2017 में मान्यता और शैक्षणिक सत्र की शुरुआत के साथ पूरी तरह से स्थापित माना जाता है। बावजूद इसके वर्तमान समय में ये मेडिकल कॉलेज पुराने स्वास्थ्य संस्थान में ही चल रहा है।
मेडिकल कॉलेज चंबा में पांच विधानसभा क्षेत्रों के कोने-कोने से मरीज उपचार करवाने के लिए पहुंचते हैं। जिस कारण रोजाना 1000 से लेकर 1200 मरीज ओपीड़ी में उपचार करवाने के लिए पहुंचते हैं। इसमें से कई मरीज ओपीडी से चिकित्सीय परामर्श लेकर लौटते हैं तो कई गंभीर बीमारी से पीड़ित मरीजों को मेडिकल कॉलेज चंबा में दाखिल किया जाता है। चंबा से टांडा, शिमला या चंडीगढ़ रेफर करने वाले मरीजों को अपने किराये पर ही रवाना होना पड़ रहा है।
शहर के प्रबुद्धजन शादी लाल शर्मा, किशोर शर्मा, मंगलेश शर्मा, डॉ डीके सोनी, सुरेश कश्मीरी और एसपी नैयर ने बताया कि मेडिकल कॉलेज प्रशासन को अपनी व्यवस्थाओं को सुधारने के लिए निरंतर प्रयास करने चाहिए। इससे लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं प्रदान करने के लिए खोले गए मेडिकल कॉलेज का सभी को अच्छा लाभ मिल सके। उधर, चिकित्सा अधीक्षक डॉ. प्रदीप सिंह ने बताया कि एक एंबुलेंस खराब से उसकी जल्द मरम्मत करवा दी जाएगी। साथ ही इसी माह पासिंग के बाद एंबुलेंस जन सेवा के लिए तैनात कर दी जाएगी।