चुवाड़ी (चंबा)। जिला चंबा को कम समय में कांगड़ा से जोड़ने वाली कालीघार में अब भूस्खलन के कारण वाहनों की रफ्तार नहीं थमेगी। लोक निर्माण विभाग सेल्फ ड्रिलिंग एंकर जियो नेट तकनीक का इस्तेमाल करेगा।
इसमें पहले पहाड़ में लोहे के सरिये डाले जाएंगे और नट की मदद से इन्हें कसा जाएगा। इससे पहाड़ की आपस में पकड़ बन जाएगी और भूस्खलन की संभावना खत्म हो जाएगी।भूस्खलन न होने से वाहनों की आवाजाही भी घंटों तक प्रभावित नहीं होगी। इससे लोगों का सफर भी सुरक्षित हो जाएगा। करीब तीन सौ मीटर के दायरे में भूस्खलन को रोकने के लिए इस तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। विभाग चंबा-लाहड़ू वाया जोत मार्ग पर कालीघार में इस तकनीक का प्रयोग करेगा। इसके लिए विभाग ने 29 करोड़ रुपये का प्रस्ताव तैयार कर सरकार को भेजा है। चंबा-लाहड़ू वाया जोत मार्ग पर कालीघार में बरसात के दिनों में भूस्खलन के कारण वाहनों की आवाजाही बंद हो जाती है। लोक निर्माण विभाग हर साल भूस्खलन के मलबे को हटाने के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर देता है, लेकिन हर साल यह समस्या बनी रहती है। इससे निपटने के लिए इस बार विभाग ने सेल्फ ड्रिलिंग एंकर जियो नेट तकनीक का इस्तेमाल करेगा। जिला चंबा को कांगड़ा से जोड़ने के लिए शार्टकट है। इस मार्ग के जरिये कम समय में लोग कांगड़ा जिले में प्रवेश करते है। बरसात के मौसम में कालीघार में भूस्खलन के कारण लोगों को हर समय अप्रिय घटना होने का खतरा रहता है।
लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता हर्ष पुरी ने बताया कि इसके लिए प्रस्ताव सरकार को भेजा गया है। कहा कि 29 करोड़ रुपये की राशि खर्च की जाएगी और सेल्फ ड्रिलिंग एंकर जियो नेट तकनीक से भूस्खलन को रोका जाएगा।