चंबा। जिला मुख्यालय में लावारिस मवेशियों से लेकर कुत्तों के आतंक से निजात दिलवाने की जिम्मेदारी लेकर कोई भी राजी नहीं है। एक विभाग दूसरे के सिर पर उसकी जिम्मेदारी थोपने की बात कहकर अपना पल्लू झाड़ रहा है।
हैरत की बात है कि बीते दो दिन में लावारिस कुत्तों ने करीब तीन दर्जन लोगों को चोटिल किया है। बावजूद इसके विभागीय अधिकारी एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डाल रहे हैं। नगर परिषद अपने स्तर पर प्रयास कर लोगों की सुरक्षा का दायित्व निभाने का दावा कर रही है। वहीं, पशुपालन विभाग सितंबर से अब तक एक हजार से अधिक कुत्तों का टीकाकरण कर अपनी पीठ थपथपाने में लगा है।
ऐसे में सवाल उठता है कि आखिरकार लोगों पर झपटने वाले कुत्तों से निजात दिलवाने का दायित्व किसका है। बीते बुधवार को शहर में करीब 20 लोगों पर लावारिस कुत्तों ने हमला कर दिया। घायलावस्था में उन्हें मेडिकल कॉलेज चंबा में उपचार के बाद घर भेजा गया। इतना ही नहीं, लावारिस कुत्तों के आतंक के चलते वीरवार सुबह भी लोग सैर करने के लिए नहीं निकले। कुछ लोग जो हिम्मत जुटाकर सैर करने निकले तो हर जगह खौफजदा ही नजर आए। शहर में वीरवार को हर कोई कुत्तों को देखकर डरता ही नजर आया।
बावजूद इसके शहर में जिन लावारिस मवेशियों और कुत्तों समेत अन्य जानवरों को कुत्तों की ओर से काटा गया है। उनके संक्रमित होने पर जिला मुख्यालय में आगामी दिनों में हालात ओर भी बिगड़ सकते हैं।
नगर परिषद अध्यक्ष नीलम नैय्यर ने बताया कि लावारिस कुत्तों को पकड़ने के लिए धर्मशाला से टीम मंगवाई गई है। जल्द उपायुक्त से मिलकर जिन मवेशियों या कुत्तों को लावारिस कुत्तों ने काटा है उन्हें वैक्सीनेट करने को लेकर मांग उठाई जाएगी।
पशुपालन विभाग के उपनिदेशक मुंशी ने बताया कि सितंबर 28 से अब तक जिले में एक हजार से अधिक पशुओं और कुत्तों को इंजेक्शन लगाए जा चुके हैं। शहर में लावारिस कुत्तों को पकड़ने के लिए नगर परिषद की ओर से धर्मशाला से टीम मंगवाई गई है। विभाग तो सिर्फ अपने स्तर पर इन्हें वैक्सीनेट ही कर सकता है। कहा कि यदि किसी कुत्ते या जानवर को पागल कुत्तों ने काटा है तो उसे 3, 7, 14, 28 या 90 दिन में वैक्सीनेट किया जा सकता है। विभाग निशुल्क ये इंजेक्शन लगाता है।