चंबा। जिले के साहो क्षेत्र की अंजू देवी इस बात का बेहतरीन उदाहरण हैं कि यदि हिम्मत हो तो सीमित साधनों से भी आत्मनिर्भर बना जा सकता है। जहां लोग ऊनी वस्त्र बनाने के लिए सुई, क्रोशिये और सिलाई पर निर्भर रहते हैं, वहीं अंजू देवी सिर्फ अपने अंगूठों की मदद से खूबसूरत मफलर बुन लेती हैं।
अंजू देवी 12 वर्षों से ऊनी उत्पाद तैयार कर रही हैं। मफलर, स्वेटर, जुराबें और टोपी सभी कुछ अंगूठे से तैयार कर रही हैं। उनका यह अनोखा हुनर हर किसी को हैरान कर देता है। इन उत्पादों की गुणवत्ता और खूबसूरती उनकी पहचान बन चुकी है।
अपनी मेहनत और कला के दम पर वह झारखंड, लुधियाना, दिल्ली और शिमला जैसे बड़े शहरों में स्टॉल लगा चुकी हैं, जहां उनके उत्पाद लोगों की पहली पसंद बनते हैं।
अंजू देवी बताती हैं कि उनके इस सफर में पति ने हमेशा हौसला बढ़ाया। उनका सहयोग ही वह प्रेरणा थी, जिसने अंजू को घर की जिम्मेदारियों के साथ आत्मनिर्भरता की राह पर आगे बढ़ने की ताकत दी।
सिर्फ ऊनी वस्त्र ही नहीं बल्कि घर पर बनाए गए अचार और चुख ने भी उनकी आमदनी में इजाफा किया है। आज वह अपने परिवार की आर्थिक रीढ़ बन चुकी हैं और अपने पति के काम में भी साझेदारी निभा रही हैं।
अंजू देवी का मानना है कि परिस्थितियां कैसी भी हों, यदि मन में कुछ करने का जुनून हो और परिवार का साथ मिले, तो बड़ी से बड़ी मंजिल भी पाई जा सकती है। उनकी कहानी उन महिलाओं के लिए प्रेरणा है, जो जिम्मेदारियों के बीच अपना हुनर आगे बढ़ाने का सपना देखती हैं।