चंबा मेडिकल कॉलेज आठ सीनियर रेजिडेंट के सहारे
मरीजों को इलाज करवाने में हो रही दिक्कत
मेडिकल कॉलेज में होती है सौ रेजिडेंट की जरूरत
प्रवीण कुमार
चंबा। प्रदेश के अन्य मेडिकल कॉलेजों में जहां सरकार विशेषज्ञों की तैनाती कर रही है वहीं, चंबा मेडिकल कॉलेज को सरकार आठ सीनियर रेजिडेंट के सहारे चला रही है। जबकि, मेडिकल कॉलेज में कम से कम सौ सीनियर रेजिडेंट होने चाहिए। क्लीनिकल सेवाओं में सीनियर रेजिडेंट चिकित्सक की सबसे महत्वपूर्ण भूमिका है। मेडिकल कॉलेज के हर क्लीनिकल विभाग में आठ से दस सीनियर रेजिडेंट होते हैं लेकिन, चंबा मेडिकल कॉलेज के विभागों में एक-एक सीनियर रेजिडेंट सेवाएं दे रहे हैं। सीनियर रेजिडेंट डाक्टर का मरीजों के इलाज से लेकर एमबीबीएस प्रशिक्षुओं की पढ़ाई में भी योगदान रहता है। अस्पताल में जब भी कोई इमरजेंसी होती है तो सीनियर रेजिडेंट मरीज के इलाज को लेकर अपने जूनियर चिकित्सकों को परामर्श देता है। जरूरत पड़ने पर स्वयं मरीज की जांच और इलाज करता है लेकिन, चंबा मेडिकल कॉलेज में ऐसी व्यवस्था देखने को नहीं मिल रही है।
चंबा मेडिकल कॉलेज में सरकार विशेषज्ञों की तैनाती करने की बजाय आउटसोर्स पर स्टाफ नर्सें, सफाई कर्मचारी और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के पद भरने जा रही है। इन पदों को भरकर सरकार चंबा वासियों को भ्रमित कर रही है। जबकि, मरीजों के इलाज में इन कर्मचारियों से ज्यादा विशेषज्ञों की जरूरत रहती है। हालात यह हैं कि मरीजों को इलाज के लिए टांडा या शिमला भेजा जा रहा है। चंबा में सामान्य ओपीडी और कोविड अस्पताल में सेवाएं देने के लिए पर्याप्त मात्रा में डॉक्टर उपलब्ध नहीं हैं। मेडिसिन विभाग के एचओडी डॉ. पंकज गुप्ता ने बताया कि मेडिकल कॉलेज में सीनियर रेजिडेंट कम से कम सौ होने चाहिए। प्रदेश के अन्य मेडिकल कॉलेजों में चंबा मेडिकल कॉलेज की तुलना में अधिक सीनियर रेजिडेंट उपलब्ध हैं। सरकार को चंबा में सीनियर रेजिडेंट के खाली पद शीघ्र भरने चाहिए।